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10 cm त्रिज्या की कोई ठोस चक्रिका तथा इतनी ही त्रिज्या का कोई छल्ला किसी क्षतिज मेज पर एक ही क्षण 10 π rad s-1 की कोणीय चाल से रखे जाते हैं। इनमें से कौन पहले लोटनिक गति आरंभ कर देगा। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

10 cm त्रिज्या की कोई ठोस चक्रिका तथा इतनी ही त्रिज्या का कोई छल्ला किसी क्षतिज मेज पर एक ही क्षण 10 π rad s-1 की कोणीय चाल से रखे जाते हैं। इनमें से कौन पहले लोटनिक गति आरंभ कर देगा। गतिज घर्षण गुणांक µk =0.2।

Numerical
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Solution

माना मेज पर रखे जाने के t s पश्चात् कोई पिण्ड लोटनिक गति प्रारंभ करता है। द्रव्यमान केन्द्र की स्थानान्तरीय गति प्रारंभ कराने के लिए आवश्यक बल घर्षण बल से मिलता है। यदि इस दौरान द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण a है तो
F = ma से, µk mg = ma

⇒ µk g = a      ...(1)

घर्षण बल पिण्ड की घूर्णी गति को मंदित करता है। माना इस दौरान पिण्ड़ का कोणीय मंदन α है तो घर्षण बल का द्रव्यमान केंद्र के परितः आघूर्ण लेने पर,

µk mg × R = -Iα .....(2)

t समय में द्रव्यमान केंद्र द्वारा प्राप्त वेग

ν = αt  ⇒    ν =  µkgt            ...(3)

माना t समय पश्चात पिण्ड का कोणीय वेग ω  रह जाता है तो

ω = ω0 + αt में,

`"ω" = "ω"_0 - (("µ"_"k" "mgR")/1) "t"` समीकरण (2) से मान रखने पर,

R से गुणा करने पर, 

`"Rω" = "Rω"_0 - (("µ"_"k" "mgR"^2)/1) "t"`  ...(4)

लोटनिक गति तब प्रारंभ होगी जबकि ν = Rω 

अतः `"μ"_"k""gt" (1 + "mR"^2/"I") = "R" "ω"_0`   .......(5)

यहाँ ω0 = 10 rad s-1, R = 0.1 m, g = 9.8 m s-2

ठोस चक्रिका के लिए `"I" = 1/2 "MR"^2`

∴  `"MR"^2/"I" = 2`

छल्ले के लिए   `"I" = "mR"^2`

∴ `"MR"^2/"I" = 1`

अतः समीकरण (5) से चक्रिका के लिए

`0.2 xx 9.8 xx "t"  (1 + 2) = 0.1 xx 10`

⇒ `"t" = (0.1 xx 10)/(0.2 xx 9.8 xx 3) = 0.17  "s"`

छल्ले के लिए, `0.2 xx 9.8 xx "t"  (1 + 2) = 0.1  xx 10`

⇒ `"t" = (0.1 xx 10)/0.2 xx 9.8 xx 2 = 0.25  "s"`

चक्रिका तथा छल्ले को लोटनिक गति’प्रारंभ करने में क्रमश: 0.17s तथा 0.25s लगेंगे। स्पष्ट है कि चक्रिका पहले लोटनिक गति प्रारंभ करेगी।

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लोटनिक गति
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2 m त्रिज्या के एक वलय (छल्ले) का भार 100 kg है। यह एक क्षैतिज फर्श पर इस प्रकार लोटनिक गति करता है कि इसके द्रव्यमान केन्द्र की चाल 20 cm/s हो। इसको रोकने के लिए कितना कार्य करना होगा ?


सूत्र `"ν"^2 = (2 "gh")/((1 + "k"^2//"R"^2))` को गतिकीय दृष्टि (अर्थात् बलों तथा बल-आघूर्णों विचार) से व्युत्पन्न कीजिए। जहाँ ν लोटनिक गति करते पिंड (वलय, डिस्क, बेलन या गोला) का आनत तल की तली में वेग है। आनत तल पर h वह ऊँचाई है जहाँ से पिण्ड गति प्रारंभ करता है। K सममित अक्ष के परितः पिंड की घूर्णन त्रिज्या है और R पिंड की त्रिज्या है।


अपने अक्ष पर ω0 कोणीय चाल से घूर्णन करने वाली किसी चक्रिका को धीरे से (स्थानान्तरीय धक्का दिए बिना) किसी पूर्णतः घर्षणरहित मेज पर रखा जाता है। चक्रिका की त्रिज्या R , है। चित्र में दर्शाई चक्रिका के बिंदुओं A, B तथा C पर रैखिक वेग क्या हैं? क्या यह चक्रिका चित्र में दर्शाई दिशा में लोटनिक गति करेगी?


स्पष्ट कीजिए कि चित्र में अंकित दिशा में चक्रिका की लोटनिक गति के लिए घर्षण होना आवश्यक क्यों है?

  1. B पर घर्षण बल की दिशा तथा परिशुद्ध लुढ़कन आरंभ होने से पूर्व घर्षणी बल-आघूर्ण की दिशा क्या है?
  2. परिशुद्ध लोटनिक गति आरंभ होने के पश्चात् घर्षण बल क्या है?


10 kg द्रव्यमान तथा 15 cm त्रिज्या का कोई सिलिंडर किसी 30° झुकाव के समतल पर परिशुद्धतः लोटनिक गति कर रहा है। स्थैतिक घर्षण गुणांक µs = 0.25 है।

  1. सिलिंडर पर कितना घर्षण बल कार्यरत है?
  2. लोटन की अवधि में घर्षण के विरुद्ध कितना कार्य किया जाता है?
  3. यदि समतल के झुकाव θ में वृद्धि कर दी जाए तो के किस मान पर सिलिंडर परिशुद्धतः लोटनिक गति करने की बजाय फिसलना आरंभ कर देगा?

नीचे दिए गए प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढिए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि सत्य है या असत्य?

लोटनिक गति करते समय घर्षण बल उसी दिशा में कार्यरत होता है जिस दिशा में पिण्ड का द्रव्यमान केंद्र गति करता है।


नीचे दिए गए प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढिए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि सत्य है या असत्य?

लोटनिक गति करते समय संपर्क बिंदु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।


नीचे दिए गए प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढिए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि सत्य है या असत्य?

लोटनिक गति करते समय संपर्क बिंदु का तात्क्षणिक त्वरण शून्य होता है।


नीचे दिए गए प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढिए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि सत्य है या असत्य?

परिशुद्ध लोटनिक गति के लिए घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य शून्य होता है।


नीचे दिए गए प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढिए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि सत्य है या असत्य?

किसी पूर्णतः घर्षणरहित आनत समतल पर नीचे की ओर गति करते पहिये की गति फिसलन गति (लोटनिक गति नहीं) होगी।


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