मराठी

Commerce (English Medium) इयत्ता १२ - CBSE Question Bank Solutions

Advertisements
विषय
अध्याय
विषय
मुख्य विषय
अध्याय

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  4701 to 4720 of 12775  next > 

'रहि चकि चित्रलिखी सी' पंक्ति का मर्म अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

गीतावली से संकलित पद 'राघौ एक बार फिरि आवौ' मैं निहित करुणा और संदेश को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

पाठ के किन्हीं चार स्थानों पर अनुप्रास के स्वाभाविक एवं सहज प्रयोग हुए हैं उन्हें छाँटकर लिखिए?

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

प्रियतमा के दुख के क्या कारण हैं?

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

कवि 'नयन न तिरपित भेल' के माध्यम से विरहिणी नायिका की किस मनोदशा को व्यक्त करना चाहता है?

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

'सेह फिरत अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए' से लेखक का क्या आशय है?

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

नायिका के प्राण तृप्त न हो पाने के कारण अपने शब्दों में लिखिए।

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

कोयल और भौरों के कलरव का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

कातर दृष्टि से चारों तरफ़ प्रियतम को ढूँढ़ने की मनोदशा को कवि ने किन शब्दों में व्यक्त किया है?

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।
[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि, मूदि रहए दु नयान।
कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपइ कान।।

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: undefined >> undefined

लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

लेखक का हिंदी-साहित्य के प्रति झुकाव किस प्रकार बढ़ता गया?

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

'निस्संदेह' शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का ज़िक्र किया है?

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

पाठ में कुछ रोचक घटनाओं का उल्लेख है। ऐसी तीन घटनाएँ चुनकर उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

"इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का अद्भुत मिश्रण रहता था।" यह कथन किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined

प्रस्तुत संस्मरण में लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के किन-किन पहलुओं को उजागर किया है?

[9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: undefined >> undefined
< prev  4701 to 4720 of 12775  next > 
Advertisements
Advertisements
CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Question Bank Solutions
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Accountancy
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Business Studies
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Computer Science (Python)
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Economics
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ English Core
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ English Elective - NCERT
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Entrepreneurship
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Geography
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Hindi (Core)
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Hindi (Elective)
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ History
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Informatics Practices
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Mathematics
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Physical Education
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Political Science
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Psychology
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Sanskrit (Core)
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Sanskrit (Elective)
Question Bank Solutions for CBSE Commerce (English Medium) इयत्ता १२ Sociology
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×