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English Medium इयत्ता १० - CBSE Question Bank Solutions for Hindi Course - A

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Hindi Course - A
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भाव स्पष्ट कीजिए -

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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भाव स्पष्ट कीजिए -

जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘आत्मकथ्य’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रुप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘असंख्य जीवन-इतिहास’ कहकर कवि किस ओर संकेत करना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि के मित्र उससे क्या आग्रह कर रहे थे? वह इस आग्रह को पूरा क्यों नहीं करना चाहता था?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि को अपनी गागर रीती क्यों लगती है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘तुम ही खाली करने वाले’ के माध्यम से कवि किनसे, क्या कहना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है और क्यों?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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उन तथ्यों का उल्लेख कीजिए जिनका उल्लेख कवि अपनी आत्मकथा में नहीं करना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि ने अपने जीवन की उज्ज्वल गाथा किसे कहा है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि के लिए सुख दिवास्वप्न बनकर रह गए, स्पष्ट कीजिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘अनुरागिनी उषा लेती थी, जिन सुहाग मधुमाया, में’ के आलोक में कवि ने अपनी पत्नी के विषय में क्या कहना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि ने अपनी तुलना किससे की है? उसके जीवन का पाथेय क्या है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘आत्मकथ्य’ कविता के माध्यम से ‘प्रसाद’ जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, वह उनकी ईमानदारी और साहस का प्रमाण है, स्पष्ट कीजिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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