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प्रश्न
वसंत पर अनेक सुंदर कविताएँ हैं। कुछ कविताओं का संकलन तैयार कीजिए।
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उत्तर
वसंत पर कविता
आए महंत वसंत।
मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टोला।
बैठे किंशुक छत्र लगा, बाँध पाग पीला,
सँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनंत।
आए महंत बसंत।
श्रद्धानत तरुओं की अंजलि से झरे पात
कोयल के मुँदै नयन, थर-थर-थर पुलक गात,
अगरु धूम लिए, झूम रहे सुमन-दिग्-दिगंत।
आए महंत वसंत।
खड़-खड़ कर ताल बजा, नाच रही विसुध हवा,
डाल-डाल अलि-पिक के गायन का बधाँ समाँ।
तरु-तरु की ध्वजा उठी जय-जये का है न अंत।
आए महंत वसंत।
-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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संबंधित प्रश्न
कविता में फ़र्श पर कौन-कौन और क्या-क्या करते हैं?
बच्चे फ़र्श पर अपनी मर्ज़ी से जो उन्हें अच्छा काम लगता है वो काम करते हैं। उसमें कभी-कभी फ़र्श को तो कभी-कभी बच्चों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। पता करो -
(क) बच्चों द्वारा फ़र्श पर क्या-क्या करने से उन्हें नुकसान होता है? उसकी सूची बनाओ।
(ख) बच्चों के किन-किन कामों से फ़र्श को नुकसान होता है?
"ये उज्ज्वल हीरों की कड़ियाँ"
ऊपर की पंक्ति में उज्ज्वल शब्द में 'ज' वर्ण दो बार आया है परंतु यह आधा (ज्) है। तुम भी इसी तरह के कुछ और शब्द खोजो। ध्यान रहे, उस शब्द में कोई एक वर्ण (अक्षर) दो बार आया हो, मगर आधा-आधा। इस काम में तुम शब्दकोश की सहायता ले सकते हो। देखें, कौन सबसे अधिक शब्द खोज़ पाता है।
क्या होगा - वर्षा हो मगर तुम्हारे स्कूल में छुट्टियाँ हों।
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(ख) इस कथन की पृष्ठभूमि स्पष्ट कीजिए।
(ग) इस उपालंभ (शिकायत) के पीछे कौन-सी पौराणिक कथा है?
‘मित्रता संबंधी दोहों का संकलन कीजिए।
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कुछ शब्द परस्पर मिलते-जुलते अर्थवाले होते हैं, उन्हें पर्यायवाची कहते हैं। और कुछ विपरीत अर्थवाले भी । समानार्थी शब्द पर्यायवाची कहे जाते हैं और विपरीतार्थक शब्द विलोम; जैसे –
| पर्यायवाची | चंद्रमा-शशि, इंदु, राका मधुकर-भ्रमर, भौंरा, मधुप सूर्य-रवि, भानु, दिनकर |
| विपरीतार्थक |
दिन-रात |
पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।
चमक - चमकना - चमकाना - चमकवाना
‘चमक’ शब्द के कुछ रूप ऊपर लिखे हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों का रूप बदलकर सही जगह पर भरो -
ज़रा सा रगड़ते ही हीरे ______ शुरू कर दिया।
चमक - चमकना - चमकाना - चमकवाना
‘चमक’ शब्द के कुछ रूप ऊपर लिखे हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों का रूप बदलकर सही जगह पर भरो -
लकी को मूर्ख _______ तो बहुत आसान है।
