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कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा? - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?

टीपा लिहा
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उत्तर

उसको विश्वास है कि अभी वो कमज़ोर नहीं है। अपितु उसके अंदर जीवन को जीने के लिए उत्साह, प्रेरणा व ऊर्जा कूट-कूट कर भरी है। एक मनुष्य तभी स्वयं का अंत मान लेता है जब वह अपने अंदर की ऊर्जा को क्षीण व उत्साह को कम कर देता है। प्रेरणा जीवन को ईंधन देने का कार्य करती है, जब ये ही न रहे तो मनुष्य का जीवन कैसा? परन्तु ये तीनों प्रचुर मात्रा में उसके पास हैं। तो कैसे वह स्वयं का अंत मान ले। इसलिए उसका विश्वास है कि वो अभी अंत की ओर जाने वाला नहीं है।

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पद्य (Poetry) (Class 8)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1: ध्वनि - कविता से [पृष्ठ २]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 3 Class 8
पाठ 1 ध्वनि
कविता से | Q 1 | पृष्ठ २

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