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तुम कौन-कौन से जानवरों पर बैठे हो? उनके नाम लिखो। - Environmental Studies (पर्यावरण अध्ययन)

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प्रश्न

तुम कौन-कौन से जानवरों पर बैठे हो? उनके नाम लिखो।

एका वाक्यात उत्तर
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उत्तर

घोड़ा, हाथी, ऊँट, गधा और भैंस

shaalaa.com
नन्दू हाथी
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 3: नन्दू हाथी - खेल-खेल में [पृष्ठ २६]

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एनसीईआरटी Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 4
पाठ 3 नन्दू हाथी
खेल-खेल में | Q 9 | पृष्ठ २६

संबंधित प्रश्‍न

नन्दू तो सिर्फ़ तीन महीने का है, लेकिन उसका वज़न 200 किलोग्राम है। तुम्हारा वज़न कितना है?


अगर तुम नन्दू होते और झुंड में रहते तो क्या-क्या करते?


हाथियों के झुंड में सभी फ़ैसले सबसे बुज़र्ग हथिनी लेती है। तुम्हारे परिवार में घर के फ़ैसले कौन लेता है?


नन्दू वह सब करता था, जो उसे पसंद था। यदि तुम्हें अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक पूरा दिन मिले, तो तुम उस दिन क्या-क्या करोगे?


पता करो और लिखो, कौन-कौन से जानवर झुंड में रहते हैं?


क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना कैसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के फ़ायदे और नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं?

फ़ायदे नुकसान
   

हाथी को चैन से बंधे होने पर कैसा महसूस होता होगा? अपनी भावना बताएँ तथा चर्चा करें। 


क्या तुमने कभी हाथी पर सवारी की है? कैसा लगा?


तुमने अपने आस-पास, फ़िल्मों या किताबों में कई जानवरों को देखा होगा। अकेले और झुंड में देखे गए जानवरों में से, किसी एक के बारे में पता करके कुछ बातें लिखो।


इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।

यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा!
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से!
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है।
नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट!
म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ।
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं।

पेड़ों पर झूमते और लटकते बंदरों और मदारी के बंदर में तुम्हें क्या अंतर लगता है?


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