मराठी

नन्दू तो सिर्फ़ तीन महीने का है, लेकिन उसका वज़न 200 किलोग्राम है। तुम्हारा वज़न कितना है?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

नन्दू तो सिर्फ़ तीन महीने का है, लेकिन उसका वज़न 200 किलोग्राम है। तुम्हारा वज़न कितना है?

एका वाक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

मेरा वज़न 25 किलोग्राम है।

shaalaa.com
नन्दू हाथी
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 3: नन्दू हाथी - पता करो [पृष्ठ २२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 4
पाठ 3 नन्दू हाथी
पता करो | Q 1 | पृष्ठ २२

संबंधित प्रश्‍न

अगर तुम नन्दू होते और झुंड में रहते तो क्या-क्या करते?


हाथियों के झुंड का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए तुम हाथियों के जितने चित्र इकट्ठा कर सकते हो, करो। अब उन्हें काटकर अपनी कॉपी में चिपकाओ।


नन्दू वह सब करता था, जो उसे पसंद था। यदि तुम्हें अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक पूरा दिन मिले, तो तुम उस दिन क्या-क्या करोगे?


क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना कैसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के फ़ायदे और नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं?

फ़ायदे नुकसान
   

हाथी को चैन से बंधे होने पर कैसा महसूस होता होगा? अपनी भावना बताएँ तथा चर्चा करें। 


तुम कौन-कौन से जानवरों पर बैठे हो? उनके नाम लिखो।


तुमने अपने आस-पास, फ़िल्मों या किताबों में कई जानवरों को देखा होगा। अकेले और झुंड में देखे गए जानवरों में से, किसी एक के बारे में पता करके कुछ बातें लिखो।


ऐसे जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सामान ढोने के काम में लाते हैं।


इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।

यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा!
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से!
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है।
नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट!
म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ।
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं।

पेड़ों पर झूमते और लटकते बंदरों और मदारी के बंदर में तुम्हें क्या अंतर लगता है?


इस हाथी के कितने पैर हैं?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×