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प्रश्न
अगर तुम नन्दू होते और झुंड में रहते तो क्या-क्या करते?
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उत्तर
यदि मैं नन्दू होता तथा झुंड में रहता तो मैं नाचता, गाता, दिनभर खेलता तथा बहुत मजे करता। रात में मैं अपनी माँ के पास ही सोता।
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| फ़ायदे | नुकसान |
हाथी को चैन से बंधे होने पर कैसा महसूस होता होगा? अपनी भावना बताएँ तथा चर्चा करें।
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तुम कौन-कौन से जानवरों पर बैठे हो? उनके नाम लिखो।
क्या तुमने किसी जानवर को दूसरे जानवर की सवारी करते देखा है? उसका नाम लिखो।
- सवार जानवर
- सवारी देता जानवर
इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।
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यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा! |
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यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से! |
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तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है। |
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नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट! |
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म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ। |
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गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं। |
तुमने इन जानवरों की बातें पढ़ीं। तुम्हें क्या लगता है, इनमें से कुछ उदास क्यों हैं?
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