Advertisements
Advertisements
प्रश्न
हाथी को चैन से बंधे होने पर कैसा महसूस होता होगा? अपनी भावना बताएँ तथा चर्चा करें।
Advertisements
उत्तर
जब हाथियों को चैन से बांधकर रखा जाता है तो वे कुछ भी करने में खुद को प्रशिक्षित और असहाय महसूस करते हैं। इससे हाथी दुखी महसूस करता है। इसके कारण हाथी आक्रमक रूप से प्रतिक्रिया कर सकते हैं या अपने आंदोलन की कमी के कारण उदास महसूस कर सकते हैं। मैं दृढ़ता से महसूस करता हूँ कि किसी भी अन्य जीवित प्राणी की तरह हाथी भी स्वतंत्रता चाहते हैं और उन्हें चैन से नहीं बांधना चाहिए।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
हाथियों के झुंड में सभी फ़ैसले सबसे बुज़र्ग हथिनी लेती है। तुम्हारे परिवार में घर के फ़ैसले कौन लेता है?
हाथियों के झुंड का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए तुम हाथियों के जितने चित्र इकट्ठा कर सकते हो, करो। अब उन्हें काटकर अपनी कॉपी में चिपकाओ।
पता करो और लिखो, कौन-कौन से जानवर झुंड में रहते हैं?
क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना कैसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के फ़ायदे और नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं?
| फ़ायदे | नुकसान |
क्या तुमने कभी हाथी पर सवारी की है? कैसा लगा?
तुमने अपने आस-पास, फ़िल्मों या किताबों में कई जानवरों को देखा होगा। अकेले और झुंड में देखे गए जानवरों में से, किसी एक के बारे में पता करके कुछ बातें लिखो।
क्या तुमने किसी जानवर को दूसरे जानवर की सवारी करते देखा है? उसका नाम लिखो।
- सवार जानवर
- सवारी देता जानवर
ऐसे और जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सवारी के काम में लाते हैं।
ऐसे जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सामान ढोने के काम में लाते हैं।
इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।
![]() |
यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा! |
![]() |
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से! |
![]() |
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है। |
![]() |
नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट! |
![]() |
म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ। |
![]() |
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं। |
तुमने इन जानवरों की बातें पढ़ीं। तुम्हें क्या लगता है, इनमें से कुछ उदास क्यों हैं?






