मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ६ वी

।। स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्‌ध अधिकार है।।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

।। स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्‌ध अधिकार है।।

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

'स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है', यह नारा लोकमान्य तिलक ने उस वक्त दिया था जब भारत देश अंग्रेजों का गुलाम था। इसके बाद क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों ने हिंदुस्तान को आजादी दिलाई। आजादी के बाद भारतीय संविधान ने सभी की स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया। स्वतंत्रता का महत्त्व इसलिए अधिक है, क्योंकि सही मायने में एक स्वतंत्र व्यक्ति ही अपनी क्षमता का शत-प्रतिशत व बेहतर इस्तेमाल कर सकता है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.1: वह देश कौन-सा है? - वह देश कौन-सा है? [पृष्ठ ५२]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 6 Maharashtra State Board
पाठ 2.1 वह देश कौन-सा है?
वह देश कौन-सा है? | Q (११) | पृष्ठ ५२

संबंधित प्रश्‍न

किसी गायक/गायिका की सचित्र जानकारी लिखो।


किसी ग्रामीण और शहरी व्यक्‍ति की दिनचर्या की तुलनात्‍मक जानकारी प्राप्त करके आपस में चर्चा करो।


यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो ....


यदि प्रकृति में सुंदर - सुंदर रंग नहीं होते तो ..........


‘शालेय स्वच्छता अभियान’ में तुम्हारा सहयोग बताओ।


नीचे दिए गए नोबल पुरस्कार प्राप्त विभूति के चित्र चिपकाओ। उन्हें यह पुरस्कार किस लिए प्राप्त हुआ है, बताओ।

१. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर २. सर चंद्रशेखर वेंकटरमन  ३. डॉ. हरगोबिंद खुराना ४. मदर टेरेसा
५. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर   ६. अमर्त्यकुमार सेन  ७. वेंकटरमन रामकृष्णन ८. कैलास सत्यार्थी

संत तुकाराम के अभंग पढ़ाे और गाओ।


उल्लेखनीय कार्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।


विभिन्न पशु-पक्षियों की बोलियों की नकल सुनाओ।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×