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पढ़ो और बोलो सहेली विद्यालय बुद्धि का खेल कभी-कभी सीखना व्यायाम सुबह भागना चाचा जी अंत्याक्षरी दिन में याद करना मामा जी चैतरै शाम को दौड़ना अध्यापिका प्रधान डाकघर

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प्रश्न

पढ़ो और बोलो

सहेली       विद्यालय बुद्धि का खेल कभी-कभी सीखना व्यायाम
सुबह     भागना चाचा जी अंत्याक्षरी दिन में  याद करना
मामा जी     चैतरै शाम को दौड़ना अध्यापिका प्रधान डाकघर  
एका वाक्यात उत्तर
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उत्तर

विद्यार्थी स्वयं पढ़िये।

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बातचीत
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 15: बातचीत - अभ्यास [पृष्ठ ८०]

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एनसीईआरटी Hindi - Durva Part 1 Class 6
पाठ 15 बातचीत
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ८०

संबंधित प्रश्‍न

एक-दो शब्‍दों में उत्‍तर लिखिए :

शिवानी की प्रिय रचना - ______ 


जोड़ियाँ मिलाइए :

उत्‍तर
धर्मयुग ______ मारिचिका
सोनार बाँग्‍ला ______ अंग्रेजी लेख
एशिया ______ पहली रचना
नटखट ______ मैं मुर्गा हूँ

कारण लिखिए :

शिवानी जी लेखिका बन गईं ______ 


लिखिए :

 


‘परिवेश का प्रभाव व्यक्‍तित्‍व पर होता है’ आपके विचार लिखिए।


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

पुल्लिंग:

तुम केला ______ (खा) 


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। पुल्लिंग:

हम विद्यालय ______ (जाना) 


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

शीला गाना गाती है।(नाचना)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

वे बच्चे शाम को खेलते हैं। (पढ़ना)


मैं सुबह ______ उठता हूँ।


हम सुबह ______ स्नान करते हैं।


मैं शाम को ______ क्रिकेट खेलता हूँ।


तुम्हारा विद्यालय कहाँ है?


अंत्याक्षरी खेलना क्यों चाहता है? 


निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

दुर्गा प्र. नौटियालः  आपने अब तक काफी साहित्‍य रचा है। क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं? 
शिवानी: जहाँ तक संतुष्‍ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्‍ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्‍वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्‍तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्‍नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ।
  1. कृति पूर्ण कौजिए:   (2)



  2. 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए।   (2)

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