Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
“वर्तमान में विद्यालयों में बढ़ती हुई अनुशासनहीनता को देखते हुए मास्टर प्रीतमचंद जैसे अध्यापकों की आवश्यकता है।" इस कथन से सहमति या असहमति के संबंध में अपने तर्कसम्मत विचार लिखिए।
Advertisements
उत्तर
वर्तमान में विद्यालयों में बढ़ती हुई अनुशासनहीनता को देखते हुए, प्रीतम चंद जैसे अध्यापकों की आवश्यकता है। आज के विद्यार्थियों को मार-पीटकर समझाना संभव नहीं है। ऐसे अध्यापक जो बच्चों की बात सुने और उनके स्तर पर उतरकर उन्हें समझा सकें, विद्यार्थियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन अध्यापकों की सीख और समझने की भावना से विद्यार्थी भी प्रभावित होते हैं और उनके उच्चतम होने का मार्ग प्रशस्त होता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती−पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं?
पीटी साहब की 'शाबाश' फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी। स्पष्ट कीजिए।
स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण 'आदमी' फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?
हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया?
विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादों को लिखिए ।
लेखक के बचपन में बच्चों के न पढ़ पाने के लिए अभिभावक अधिक जिम्मेदार थे। इससे आप कितना सहमत हैं?
लेखक ने ‘सस्ता सौदा’ किसे कहा है? और क्यों?
लेखक ने सातवीं कक्षा तक की जो पढ़ाई की उसमें स्कूल के हेडमास्टर शर्मा जी का योगदान अधिक था। स्पष्ट कीजिए।
अथवा
लेखक की पढ़ाई में हेडमास्टर शर्मा जी का योगदान स्पष्ट कीजिए।
पीटी मास्टर प्रीतमचंद को देखकर बच्चे क्यों डरते थे?
लेखक और उसके साथी प्रीतमचंद की दी गई सज़ा वाला कौन-सा दिन आजीवन नहीं भूल सके?
अथवा
फ़ारसी की कक्षा में मास्टर प्रीतमचंद ने किस तरह शारीरिक दंड दिया जो बच्चों को आजीवन याद रहा?
हेडमास्टर ने प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?
प्रीतमचंद के निलंबन के बाद भी बच्चों के मन में उनका डर किस तरह समाया था?
लेखक ने अपने विद्यालय को हरा-भरा बनाने के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन किया है। इससे आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
लेखक और उसके साथियों द्वारा गरमी की छुट्टियाँ बिताने का ढंग आजकल के बच्चों द्वारा बिताई जाने वाली छुट्टियों से किस तरह अलग होता था?
‘सपनों के-से दिन’ पाठ के आधार पर बताइए कि बच्चों का खेलकूद में अधिक रुचि लेना अभिभावकों को अप्रिय क्यों लगता था? पढ़ाई के साथ खेलों का छात्र जीवन में क्या महत्त्व है और इससे किन जीवन-मूल्यों की प्रेरणा मिलती है?
लेखक गुरदयाल सिंह अपने छात्र जीवन में छुटटियों के काम को पुरा करने के लिए योजनाएँ तैयार करते थे। क्या आप की योजनाएँ लेखक की योजनाओं से मेल खाती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
‘सपनों के - से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक को नयी श्रेणी में जाने की प्रसन्नता अन्य विद्यार्थियों की तरह क्यों नहीं होती थी?
