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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए: हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग। लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।

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प्रश्न

निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:

हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।

व्याकरण/भाषा
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उत्तर

अतिशयोक्ति अलंकार

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अलंकार
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2021-2022 (March) Set 1

संबंधित प्रश्‍न

निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

लट लटकनि मनो मत्‍त मधुप गन मादक मधुहि पियें। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कहै कवि बेनी बेनी ब्‍याल की चुराई लीनी। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

तीन बेर खाती थीं वे तीन बेर खाती हैं। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

संसार की सम‍रस्‍थली में धीरता। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

सुख चपला-सा, दुख घन में
उलझा है चंचल मन कुरंग।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

मानो घर-घर न हो, जैसे कोई चिड़ियाघर हो।
जिसमें खूँखार जानवर आबाद हों।


अलंकार बताइए:
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो


अलंकार बताइए:

खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई


उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

अब न घिरत घन आनंद निदान को।


अपने द्वारा इस सत्र में पढ़ी किन्हीं दो कविताओं में प्रयुक्त अलंकारों के महत्व का वर्णन कीजिए।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

चरण सरोज पखारन लागा।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।


"अर्थ बिना कब पूर्ण हैं, शब्द, सकल जग-काज।

अर्थ अगर आ जाए तो, ठाठ-बाट औ राज।।" 

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है-


"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।

धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उपप्रकार लिखिए:

वाक्य प्रकार उपप्रकार
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ______ ______

निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

लता पवन ले प्रगट भरा, लेहि अक्सर दोय भाइ।
निकसे जनु जुण विमले बिंधु, जलद परले बिलगाइ ॥

निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

उदित उदय गिरि मंच पर।
रघुबर बाल पतंग।।

निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:

सिंधु - सेज पर धरा - वधू।
अब तनिक संकुचित बैठी - सी॥


निम्नलिखित उदाहरण के रस पहचानकर लिखिए।

कहूँ सुलगत कोउ चिता कहूँ कोड जात लगाई।
एक लगाई जात एक की राख बुझाई।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।


“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -


“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


“पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश।” इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”

इस दोहे में निहित अलंकार है -


'जो रहीम गति दीप की कुल कपूत की सोय।
बारै उजियारों करै, बढ़ै अँधेरो होय।'

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -


'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


'देखि सुदामा की दीन-दशा करुणा करके करुणानिधि रोए,
पानी परात कौ हाथ छुऔ नहिं नैनन के जल सौं पग धोए।'

इस काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


'जा तन की झाँई परै श्याम हरित दुति होय।' - इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


“वह शर इधर गांडीव गुण से भिन्न जैसे ही हुआ, धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्‍न वैसे ही हुआ।” - काव्य-पंक्ति में अलंकार है -


'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -


'उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।' में अलंकार है -


'आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।'

- प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है?


स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -

  स्तम्भ-I   स्तम्भ-II
(I) हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। (अ) श्लेष अलंकार
(II) हरिमुख मानो मधुर मयंक। (ब) उत्प्रेक्षा अलंकार
(III) पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। (स) मानवीकरण अलंकार

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

चरण-कमल-सम-कोमल।


निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:

वाक्य प्रकार उप-प्रकार
जो रहीम गति दीप की,
कुल कपूत गति सोई।
बारे उजियारो करे,
बढ़े अँधेरो होई।
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