मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ९ वी

निम्‍न शब्‍द के पर्यायवाची शब्‍द लिखिए: अरण्य

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प्रश्न

निम्‍न शब्‍द के पर्यायवाची शब्‍द लिखिए:

तक्ता
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उत्तर

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व्याकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.01: चाँदनी रात - भाषा बिंदु [पृष्ठ ३]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.01 चाँदनी रात
भाषा बिंदु | Q 1. 6 | पृष्ठ ३

संबंधित प्रश्‍न

नीचे दिए गए वाक्य पढ़िए तथा ‘और’ शब्द के विभिन्न प्रयोगों पर ध्यान दीजिए-

(क) पास में सुंदर और शक्तिशाली युवक रहा करता था। (दो पदों को जोड़ना)

(ख) वह कुछ और सोचने लगी। (‘अन्य’ के अर्थ में)

(ग) एक आकृति कुछ साफ़ हुई… कुछ और… कुछ और… (क्रमशः धीरे-धीरे के अर्थ में)

(घ) अचानक वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ गई। (दो उपवाक्यों को जोड़ने के अर्थ में)

(ङ) वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था। (‘अधिकता’ के अर्थ में)

(च) उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। (‘निकटता’ के अर्थ में)


नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए-

  • मेरा एक भाई भी पुलिस में है।
  • यह तो अति सुंदर ‘डॉगी’ है।
  • कल ही मैंने बिलकुल इसी की तरह का एक कुत्ता उनके आँगन में देखा था।

वाक्य के रेखांकित अंश ‘निपात’ कहलाते हैं जो वाक्य के मुख्य अर्थ पर बल देते हैं। वाक्य में इनसे पता चलता है किस बात पर बल दिया जा रहा है और वाक्य क्या अर्थ दे रहा है। वाक्य में जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल या भाव उत्पन्न करने में सहायता करते हैं उन्हें निपात कहते हैं; जैसे-ही, भी, तो, तक आदि।
ही, भी, तो, तक आदि निपातों का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए।


निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

पुस्‍तक


लिखो :

पर्यायवाची शब्द :


लिखो :

पर्यायवाची शब्द :


निम्‍नलिखित शब्द के आधार पर मुहावरे लिखकर उनका अपने वाक्‍य में प्रयोग करो।

पानी


शालेय बैंड पथक के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने हेतु अपने विद्‍यालय के प्राचार्य से विद्‌यार्थी प्रतिनिधि के नाते अनुमति माँगते हुए निम्‍न प्रारूप में पत्र लिखो:

दिनांक:
प्रति,

______
______

विषय : ______
संदर्भ : ______

महोदय,
विषय विवेचन

                    ______________________________

                    ______________________________

                    ______________________________

आपका/आपकी आज्ञाकारी,
______________________________
(विद्‍यार्थी प्रतिनिधि)
कक्षा : ______


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

अमरु स्‍वभाव से अल्‍पभाषी है।


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

इस भौतिक जीवन में मनुष्य बहुत खुश है।


नीचे दिए गए चिन्ह के सामने उनका नाम लिखिए तथा वाक्य में उचित विरामचिह्न लगाइए 

" ........ "


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

यह गंगा का है नवल धार।


‘हीन’ शब्द का प्रयोग करके कोई तीन अर्थपूर्ण शब्द तैयार करके लिखिए:

जैसे - आत्म + हीन = आत्महीन

(च) ______

(छ) ______

(ज) ______


उचित विराम चिह्न लगाओ:

विशाखा लंदन से दिल्‍ली आती है हवा जैसी आने की सूचना नहीं देती।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

जलाशय चॉंदी की भाँति चमचमा रहा था।


हिंदी-मराठी के समानार्थी मुहावरे और कहावतें सुनो और उनका द्विभाषी लघुकोश बनाओ:

जैसे- अधजल गगरी छलकत जाए = उथळ पाण्याला खळखळाट फार.


अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :

खूब पढ़ो खूब बढ़ो।


‘रमेश पुस्तक पढ़ता है।’ इस वाक्य को सभी काल में परिवर्तित करके भेदों सहित बताओ और लिखो।


सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध, विनती के वाक्य विरामचिह्‌न सहित पढ़ो और समझो :

अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।


निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्‍द रिक्‍त स्‍थान में लिखिए:-

शब्द पर्यायवाची शब्द
सुगंध        

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह शब्द विलोम
अप + कीर्ति   ×

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ दुर्लभ ×

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
चतुष्पाद ______ + ______  

परिच्छेद से समुच्च्यबोधक अव्यय ढूँढकर लिखिए।

           भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्‍ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्‍ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा।

           काठमांडू से एवरेस्‍ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्‍ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्‍था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्‍द हमने १९००० फीट पर स्‍थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्‍ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्‍था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्‍ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया।


इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।


रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए।

हमें सदैव अपने लिए किए गए कामों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए ।


निर्देशानुसार काल परिवर्तन कीजिए:


नीचे दिए गए विरामचिह्न के सामने उनके नाम लिखकर इनका उपयोग करते हुए वाक्य बनाइए:

चिह्न नाम वाक्य
...    

मुहावरों का प्रयोग/चयन करनाा ।

‘मुहावरा’ शब्द अरबी भाषा का है जिसका अर्थ ‘अभ्यास होना’ या आदी होना’ होता है। इस प्रकार मुहावरा शब्द अपने-आप में स्वयं मुहावरा है, क्योंकि यह अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर असामान्य अर्थ प्रकट करता है।


शब्‍द संपदा -

शब्‍दों के लिंग, वचन, विलोमार्थक, समानार्थी, पर्यायवाची, शब्‍दयुग्‍म, अनेक शब्‍दों के लिए एक शब्‍द, भिन्नार्थक शब्‍द, कठिन शब्‍दों के अर्थ, विरामचिह्न, उपसर्ग-प्रत्‍यय पहचानना/अलग करना, लय-ताल युक्‍त शब्‍द ।


निम्नलिखित मुहावरे के सही अर्थ का चयन कीजिए।

पाँचो अंगुलियाँ घी में होना


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