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मूक फिल्म देखने का एक उपाय यह है कि आप टेलीविजन की आवाज बंद करके फिल्म देखें। उसकी कहानी को समझने का प्रयास करें और अनुमान लगाएँ कि फिल्म में संवाद और दृश्य की हिस्सेदारी कितनी है?

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प्रश्न

मूक फिल्म देखने का एक उपाय यह है कि आप टेलीविजन की आवाज बंद करके फिल्म देखें। उसकी कहानी को समझने का प्रयास करें और अनुमान लगाएँ कि फिल्म में संवाद और दृश्य की हिस्सेदारी कितनी है?

टीपा लिहा
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उत्तर

टेलीविजन की आवाजे बंद करके हम जब फिल्म देखते हैं और कहानी का अनुमान लगाते हैं तो पाते हैं कि संवाद और दृश्य एक-दूसरे के बिना-अधूरे से लगते हैं। संवाद के अभाव में फिल्म की कहानी समझ पाना कितना कठिन लगता है। वास्तव में संवाद और दृश्य एक-दूसरे के पूरक बनकर दृश्य या फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं। इससे दर्शकों की एकता भी फिल्म में बनी रहती है। दृश्यों में संवाद की आवश्यकता के कारण ही मूक सिनेमा की लोकप्रियता के युग में भी सवाक् फिल्में इतनी लोकप्रिय हुईं कि दर्शकों की भीड़ को सँभालना मुश्किल हो गया।

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गद्य (Prose) (Class 8)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 11: जब सिनेमा ने बोलना सीखा - अनुमान और कल्पना [पृष्ठ ६६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 3 Class 8
पाठ 11 जब सिनेमा ने बोलना सीखा
अनुमान और कल्पना | Q 2 | पृष्ठ ६६

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