मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ७ वी

मैंने समझा रहस्य पाठ से

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

मैंने समझा रहस्य पाठ से 

एका वाक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

हमें अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए सच्चाई का पता लगाने के लिए निडर होकर प्रयत्न करना चाहिए।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.07: रहस्‍य - मैंने समझा [पृष्ठ ४६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 2.07 रहस्‍य
मैंने समझा | Q (१) | पृष्ठ ४६
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 15 रहस्य
पाठ्य प्रश्न | Q १. | पृष्ठ ६१

संबंधित प्रश्‍न

‘हाफ मैराथन’ में सफलता प्राप्त करने के लिए कौन-कौन-सी तैयारियाँ करोगे, लिखो।


पानी, वाणी, दूध इन शब्‍दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।


किसानों के सामने आने वाली समस्‍याओं की जानकारी प्राप्त करके उन समस्‍याओं को दूर करने हेतु चर्चा करो।



किसी दुकानदार और ग्राहक के बीच होने वाला संवाद लिखो और सुनाओ: जैसे - माँ और सब्जीवाली।


।। हवा प्रकृति का उपहार, यही है जीवन का आधार ।।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?


संत तुकाराम के अभंग पढ़ाे और गाओ।


पसंदीदा विषय पर विज्ञापन बनाकर उसको पढ़ो।


समाज सेवी महिला की जीवनी पढ़कर प्रेरणादायी अंश चुनाे और बताओ।


यदि भोजन से नमक गायब हो जाए तो...


।। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन। याेगासन है, उत्तम साधन ।।


उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की कोई एक कहानी पढ़ो। उसका विषय बताओ।


ऐतिहासिक वास्तुओं का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


अक्षर समूह में से वैज्ञानिकों के उचित नाम बताओ और लिखाे :

मी भा हो भा     - ______
नी से ज भि र   - ______
मं बं जू स ल   - ______
स्क रा र्य भा चा   - ______
जे. क म ला ए.  पी. - ______
जा अ न म्म की ल - ______
ना व क ला चा ल्प - ______

अपनी कक्षा द्‍वारा की गई किसी क्षेत्रभेंट का वर्णन लिखिए।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

'भक्तिन' एक कर्मठ नारी के संघर्षमय जीवन की कहानी है। इस कथन को भक्तिन के जीवन के चार अध्यायों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×