Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ से क्या संदेश मिलता है? अपने शब्दों में समझाइए।
Advertisements
उत्तर
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ नामक पाठ के माध्यम से हमे फ़ादर जैसे मानवीय करुणा के सागर बुल्के की तरह करुणा एवं सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करने का संदेश मिलता है, वही यह भी संदेश मिलता है, कि हमें अपनी मातृभूति से असीम प्यार करना चाहिए। वे दुःखी व्यक्ति को अपार समता व शांति प्रदान करते थे। इसके अतिरिक्त हम भारत वासियों को विदेश में बसने का लोभ त्याग कर अपने देश की सेवा करनी चाहिए। पाठ से हमें हिंदी और भारत दोनों का ही भरपूर आदर करने का संदेश भी प्राप्त होता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?
आशय स्पष्ट कीजिए -
नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
आशय स्पष्ट कीजिए -
फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।
आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?
'बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।'- इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?
लेखक ने फ़ादर का शब्द चित्र किस तरह खींचा है?
‘संन्यासी होने के बाद भी फ़ादर का अपनी माँ से स्नेह एवं प्रेम कम न हुआ’–स्पष्ट कीजिए।
फ़ादर पास्कल ने ऐसा क्यों कहा कि इस धरती से ऐसे और रत्न पैदा हों?
'फ़ादर कामिल बुल्के संकल्प से संन्यासी थे, मन से नहीं।' लेखक के इस कथन के आधार पर सिद्ध कीजिए कि फ़ादर का जीवन परंपरागत संन्यासियों से किस प्रकार अलग था ?
फ़ादर कामिल बुल्के द्वारा भारत को ही अपनी कर्मभूमि चुनने का कारण ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार परस्पष्ट कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर लिखिए कि फ़ादर कामिल बुल्के की मृत्यु से बहुत बड़ी संख्या में लोग शोक-संतप्त क्यों हुए?
“फ़ादर कामिल बुल्के का सान्निध्य लेखक के लिए सुखद अनुभूति थी।” कथन का आशय ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के लेखक और फ़ादर बुल्के के संबंध, आपकी दृष्टि में कैसे थे? इससे फ़ादर के स्वभाव के विषय में क्या कहा जा सकता है?
