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प्रश्न
मान लीजिए कि R में द्वारा द्वि-आधारी *, a * b = 1 + ab, ∀ a, b ∈ R तो संक्रिया *
पर्याय
क्रम-विनिमेय है किंतु साहचर्य नहीं है।
साहचर्य है किंतु क्रम-विनिमेय नहीं है।
न तो क्रम-विनिमेय है और न साहचर्य है।
क्रम-विनिमेय तथा साहचर्य दोनों ही है।
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उत्तर
क्रम-विनिमेय है किंतु साहचर्य नहीं है।
व्याख्या:
यह देखते हुए कि * R पर a * b = 1 + ab, ∀ a, b ∈ R द्वारा परिभाषित एक द्विआधारी संक्रिया है।
तो, हमारे पास * b = ab + 1 = b * a है।
तो, * क्रम-विनिमेय द्विआधारी संक्रिया है।
अब, a * (b * c) = a * (1 + bc) = 1 + a(1 + bc) = 1 + a + abc
भी,
(a * b) * c = (1 + ab) * c = 1 + (1 + ab)c = 1 + c + abc
इस प्रकार, a * (b * c) ≠ (a * b) * c
अतः * साहचर्य नहीं है।
इसलिए, * क्रमविनिमेय है लेकिन साहचर्य नहीं है।
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