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प्रश्न
कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है?
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उत्तर
कविता “दीवानों की हस्ती” में कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ कहा है, जो बहुत गहरे भाव को दर्शाता है। कवि का मानना है कि दीवाने (अर्थात उत्साही और निर्भय लोग) जहाँ भी जाते हैं, वहाँ खुशियाँ, उत्साह और ऊर्जा भर देते हैं। वे किसी स्थान पर आते हैं तो वहाँ उल्लास का वातावरण बन जाता है जैसे कोई त्योहार आ गया हो। लेकिन जब वे वहाँ से चले जाते हैं, तो लोगों की आँखों में आँसू रह जाते हैं, क्योंकि उनकी उपस्थिति में जो आनंद और प्रेरणा मिली थी, वह अब नहीं रही।
यह पंक्ति इस बात की ओर भी संकेत करती है कि दीवाने अपने जीवन में किसी लक्ष्य से बंधे नहीं होते। वे मुक्त चित्त और मस्त होकर चलते रहते हैं, कभी यहाँ, कभी वहाँ। वे अपने जीवन में मस्ती का आलम साथ लेकर चलते हैं, और दूसरों को भी उसी मस्ती में सराबोर कर देते हैं। उनका आना समाज में उमंग और प्रेरणा लेकर आता है, और जाना एक खालीपन छोड़ जाता है।
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