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प्रश्न
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उत्तर
कुश्ती के समय जब ढोल की आवाज़ सुनाई देती थी, तो लुट्टन रोमांचित हो जाता था। ढोल की आवाज़ उसके लहू में जोश भर देता थी। पहली बार जब उसने कुश्ती लड़ी, तो यही ढोल साथी की तरह उसके साथ बज रहा था। ढोल में पड़ती हर थाप मानो उसे प्रेरणा दे रही हो।
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कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?
गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान का ढोल क्यों बजाता रहा?
ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?
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कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-
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चर्चा करें- कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज़ नहीं है।
- चिकित्सा
- क्रिकेट
- न्यायालय
- या अपनी पसंद का कोई क्षेत्र
- फिर बाज़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
- राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए।
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इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।
‘ढोल में तो जैसे पहलवान की जान बसी थी।’ ‘पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर तर्क सहित पंक्ति को सिद्ध कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।
