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प्रश्न
घर में अतिथि के आगमन पर आपको कैसा लगता है, बताइए।
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उत्तर
हमारे देश में अतिथियों को देवता माना गया है। जिस प्रकार से हम देवताओं का आदर करते हैं, उसी प्रकार अतिथियों का भी हमें आदर सम्मान करना चाहिए। अतिथि का अर्थ ही होता है, जिसके आने-जाने का समय तथा दिन निर्धारित न हो। यदि सुबह का समय होगा तो चाय-नाश्ता करवाएँगे, दोपहर के समय उसे प्रीतिभोज व रात्रि मैं मेहमान आए तो रात्रिभोज करवाना हमारा कर्तव्य बनता है। आपके घर पहुँचने वाला अतिथि कभी असमय भी पहुँच सकता है। ऐसे समय लोग भीतर ही भीतर कुढ़ते हैं। यह ठीक नहीं है। असमय आनेवाले अतिथि को भी हमें वही सम्मान देना चाहिए, जो सम्मान हम समय से आनेवाले अतिथि को देते है।
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कोई साप्ताहिक पत्रिका अनियमित रूप में प्राप्त होने के विरोध में शिकायत करते हुए संपादक को निम्न प्रारूप में पत्र लिखो :
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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दो।


।। जीवन चलता ही रहता।।
शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः
जैसे - श्रृंखला ..... लालित्य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्य .....।
चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

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दिए गए चित्रों के आधार पर उचित और आकर्षक विज्ञापन तैयार करो।

बिना सोचे विचारे किसी बात पर विश्वास ना करें।
।। स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है।।
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:

आप आस्था/मनु हैं। 'ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य' इस विषय पर लगभग 100 शब्दों में अपने विचार लिखकर किसी दैनिक समाचार- पत्र के संपादक को भेजिए।
