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प्रश्न
घनानंद की रचनाओं की भाषिक विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
- घनानंद की रचनाओं में अलंकारों का बड़ा सुंदर वर्णन मिलता है। वे अलंकारों का प्रयोग बड़ी प्रवीणता से करते थे। उनकी दक्षता का परिचय उनकी रचनाओं का पठन करते ही पता चल जाता है।
- घनानंद ब्रजभाषा के प्रवीण कवि थे। इनका भाषा साहित्यिक तथा परिष्कृत है।
- लाक्षणिकता का गुण इनकी भाषा में देखने को मिलता है।
- काव्य भाषा में सर्जनात्मक के जनक भी थे।
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घनानंद
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
