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गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था? उससे छुटकारा पाने के लिए उसने क्या उपाय सोचा?

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प्रश्न

गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था? उससे छुटकारा पाने के लिए उसने क्या उपाय सोचा?
दीर्घउत्तर
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उत्तर

गाड़ी पर सवार होकर उसे बड़ी बहुरिया के एक-एक वचन काँटे के समान चुभ रहे थे। आज तक वह जितने भी संवाद लेकर गया था, वे ऐसे नहीं थे। इसमें एक बेचारी बेटी अपनी माँ से सहायता के लिए पुकार रही थी। उसकी मार्मिक दशा का वर्णन उसके एक-एक वचन से होता था। उसके वचन संवदिया को दुखी कर रहे थे। उसने उनसे छुटकारा पाने के लिए पुराने संदेशों को याद करने लगा। साथ ही उसने एक पुराना संवदिया गीत भी याद किया।
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संवदिया
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पाठ 2.03: फणीश्वरनाथ 'रेणु' (संवदिया) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ८६]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
पाठ 2.03 फणीश्वरनाथ 'रेणु' (संवदिया)
प्रश्न-अभ्यास | Q 6. | पृष्ठ ८६

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