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प्रश्न
एक अभिक्रिया में यदि अभिक्रियक A की सांद्रता तिगुनी कर दी जाए तो अभिक्रिया वेग सत्ताइस गुना बढ़ जाता है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
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उत्तर
दर = `k["A"]^alpha` .....(i)
27 × दर = `k["3A"]^alpha` .....(ii)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) से भाग देने पर हमें α = 3 प्राप्त होता है
∴ प्रतिक्रिया का क्रम = 3
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निम्नलिखित अभिक्रिया के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए।
\[\ce{3NO_{(g)} -> N2O_{(g)}}\] वेग = k [NO]2
किसी अभिक्रियक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा, यदि अभिक्रियक की सांद्रता दुगुनी कर दी जाए?
A और B के मध्य अभिक्रिया में A और B की विभिन्न प्रारंभिक सांद्रताओं के लिए प्रारंभिक वेग (r0) नीचे दिए गए हैं।
A और B के प्रति अभिक्रिया की कोटि क्या है?
| A/mol L−1 | 0.20 | 0.20 | 0.40 |
| B/mol L−1 | 0.30 | 0.10 | 0.05 |
| r0/mol L−1 s−1 | 5.07 × 10−5 | 5.07 × 10−5 | 1.43 × 10−4 |
अरेनिअस समीकरण के अनुसार `"Ae"^(−"E"_"a"//"RT")` अभिक्रिया दर स्थिरांक k के बराबर है। ln k और `1/"T"` के मध्य ग्राफ को निम्न विकल्पों में से किसके द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
नीचे दी गई अभिक्रिया की अभिक्रिया दर के लिए निम्नलिखित व्यंजकों में से कौन-सा सही है?
\[\ce{5Br^- (aq) + BrO3^- (aq) + 6H^+ (aq) -> 3Br2 (aq) + 3H2O(l)}\]
एक जटिल अभिक्रिया के लिए ______।
- समग्र अभिक्रिया की कोटि सबसे धीमे पद् की आण्विकता के समान होती है।
- समग्र अभिक्रिया की कोटि सबसे धीमे पद् की आण्विकता से कम होती है।
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- सबसे धीमे पद की आण्विकता कभी भी शून्य अथवा अपूर्णांक नहीं होती।
आप निम्नलिखित अभिक्रिया का वेग नियम कैसे निर्धारित कर सकते हैं?
\[\ce{2NO (g) + O2(g) -> 2NO2 (g)}\]
अभिकथन - अर्रेनिअस समीकरण से सामान्य तथा जटिल अणुओं के लिए निर्धारित वेग स्थिरांक लगभग परिशुद्ध होते हैं।
तर्क - संघट्ट के समय अभिक्रियक अणुओं का कोई भी अभिविन्यास होने पर भी रासायनिक परिवर्तन हो जाता है।
किसी अभिक्रियक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा, यदि अभिक्रियक की सांद्रता आधी कर दी जाए?
एक अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है। A तथा B दोनों की सांद्रता दुगुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
