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प्रश्न
चित्र में हाइड्रोजन गैस के विरचन के लिए दर्शाए गए रेखांकित चित्र में, यदि निम्नलिखित परिवर्तन कर दिए जाए तो क्या होगा?

- परखनली में दानेदार जिंक के स्थान पर जिनक धूल की कुछ मात्रा ली जाए।
- तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लिया जाए।
- जिंक के स्थान पर कॉपर टर्निंग ली जाए।
- तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के स्थान पर सोडियम हाइड्रोक्साइड लिया जाए तथा परखनली को गरम किया जाए।
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
- हाइड्रोजन गैस अधिक गति से विकसित होगी क्योंकि जिंक धूल जिंक कणिकाओं की तुलना में अधिक सतह क्षेत्र प्रदान करती है।
- दोनों की प्रतिक्रिया एक जैसी होगी। विकसित गैस के आयतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- कॉपर या तो तनु HCl या तनु H2SO4 के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है। दोनों ही स्थितियों में कोई गैस नहीं निकलेगी।
- इस मामले में भी हाइड्रोजन गैस विकसित होगी।
`"Zn" + 2"NaOH" overset("ऊष्मा")(->) underset("सोडियम जिंकेट")("Na"_2"ZnO"_2) + "H"_2`
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अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुणधर्म समझना
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
