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भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।

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प्रश्न

भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

दोनों कविताओं में सच्चे मनुष्य की पहचान परोपकार, करुणा और दूसरों के प्रति सहानुभूति से बताई गई है। मैथिलीशरण गुप्त की ‘मनुष्यता’ में वही मनुष्य श्रेष्ठ माना गया है जो दूसरों के लिए जीता और आवश्यकता पड़ने पर प्राण तक न्योछावर कर देता है। भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ में भी दूसरों के सुख-दुःख को समझने, उनकी सहायता करने और स्वार्थ से ऊपर उठकर जीवन जीने वाले को ही सच्चा प्राणी कहा गया है। अतः दोनों कविताओं का समान भाव है, मनुष्यता का आधार परोपकार, सहानुभूति और त्याग है।

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मनुष्यता
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पाठ 1.4: मनुष्यता - परियोजना कार्य [पृष्ठ १८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 1.4 मनुष्यता
परियोजना कार्य | Q 2. | पृष्ठ १८

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