Advertisements
Advertisements
प्रश्न
बलदेव और चीता दोनों गुब्बारे पर ऊपर उठते जा रहे थे। फिर भी चीते ने बलदेव को कोई नुकसान क्यों नहीं पहुँचाया?
Advertisements
उत्तर
चीता स्वयं अपने प्राणों को संकट में जानकर घबरा गया। वह अपना सारा चीतापन भूल गया था। भय के कारण वह बलदेव को नुकसान नहीं पहुँचा पाया।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
पक्षी कैसा जीवन जीना चाहते हैं?
नहाकर लौटने पर दादी माँ लेखक के लिए क्या लेकर आई थी?
रामी की चाची दादी माँ को क्या आशीर्वाद दे रही थी?
आप नदियों को किस रूप में देखते हैं? उनकी सफ़ाई के लिए क्या प्रयास करते हैं या कर सकते हैं?
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
‘मिठाईवाला’ पाठ के लेखक के नाम हैं
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
दिव्या अनिल के साथ अस्पताल क्यों गई?
हर्ष और कनक छोटे होने पर भी समुद्र की लहरों में कैसे तैर सकते थे?
कनक छोटे-छोटे शंखों की मालाएँ बनाकर क्यों बेचती थी?
मंजरी बिलकुल गुड़िया जैसी सुंदर थी। तुम्हें सबसे सुंदर कौन लगती/लगता है? क्यों?
तुम्हारे कितने दोस्तों और संबंधियों का जन्मदिन मनाया जाता है और कितनों का नहीं मनाया जाता?
क्या तुमने अपने आस-पास के जानवरों की दुर्दशा देखी है? उसके बारे में बताओ।
आगे 'किताबें' नामक कविता दी गई है। उसे पढ़ो और उस पर आपस में बातचीत करो।
कुछ ऐसे विकलाँग व्यक्तियों के नाम लिखो जिन्होंने जीवन में विशेष सफलता प्राप्त की है।
इस कहानी को पढ़कर क्या आपको यह अनुभूति हुई कि दूसरों को प्यार और खुशी देने से अपने मन का दुख कम हो जाता है? समूह में बातचीत कीजिए।
ब्लड-बैंक में रक्तदान से क्या लाभ है?
इस कहानी में आपने देखा कि वह चिड़िया अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चींटियों, ग्रह-नक्षत्रों तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीज़ों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।
बहुविकल्पी प्रश्न
“यह उसकी हार्दिक इच्छा थी’ वाक्य में हार्दिक शब्द है
जब मास्टर जी अप्पू से सवाल पूछते हैं तो वह कौन सी दुनिया में खोया हुआ था? क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी दिन क्लास में रहते हुए भी क्लास से गायब रहे हों? ऐसा क्यों हुआ और आप पर उस दिन क्या गुजरी? अपने अनुभव लिखिए।
इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?
पिछली शताब्दी में खानपान की बदलती हुई तसवीर का खाका खींचें तो इस प्रकार होगा-
सन् साठ का देशक – छोले-भटूरे
सन् सत्तर का दशक – इडली, डोसा
सन् अस्सी का दशक – तिब्बती (चीनी) भोजन
सन् नब्बे का दशक – पीजा, पाव-भाजी
इसी प्रकार आप कुछ कपड़ों या पोशाकों की बदलती तसवीर का खाका खींचिए।
