मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता ९ वी

अलंकार पढ़िए और समझिए:

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

अलंकार पढ़िए और समझिए:

तक्ता
Advertisements

उत्तर

अलंकार और उसके भेद
शब्दालंकार: जहाँ काव्य में किसी विशेष शब्‍द के प्रयोग से चमत्‍कार या उसके सौंदर्य में वृद्‌धि होती है, वहाँ शब्दालंकार होता है। अर्थालंकार: जब काव्य में शब्‍दों के अर्थ से काव्य सौंदर्य में वृद्‌धि होती है, तब वहाँ अर्थालंकार होता है।
अनुप्रास: उदाहरण में ‘च’ वर्ण की आवृत्‍ति बार-बार हुई है अतः यह अनुप्रास अलंकार है। यमक: उदाहरण में एक कनक का अर्थ सोना और दूसरे कनक का अर्थ धतूरा है। एक शब्‍द के दो अर्थ हैं। अतः यह यमक अलंकार हैं। श्लेष: इस उदाहरण में बारे का अर्थ जलाने पर और बचपन में तथा बढ़े का अर्थ बुझने पर और बड़े होने पर है यहाँ एक शब्‍द के अनेक अर्थ हैं। अतः यह श्लेष अलंकार है। उपमा: उदाहरण में शब्‍द समानता प्रकट की गई है। यहाँ एक वस्‍तु को दूसरे के समान बताया गया है। अतः यह उपमा अलंकार है। रूपक: उदाहरण में एक वस्‍तु पर अर्थात राम पर धन (रतन) का (राम रूपी धन) का आरोप किया गया है। अतः यह रूपक अलंकार है। उत्प्रेक्षा: उदाहरण में एक वस्‍तु में दूसरी वस्‍तु का अर्थात श्याम के शरीर पर पीत वस्‍त्र और नील पर्वत पर हुए प्रभात की संभावना की गई है। अतः यह उत्‍प्रेक्षा अलंकार है।
उदाहरण:
चारु चंद्र की चंचल
किरणें
खेल रहीं हैं जल-थल में।
उदाहरण:
कनक-कनक ते सौगुनी,
मादकता अधिकाय।
वा खाए बौराय नर,
वा पाए बौराय।
उदाहरण:
जो रहीम गति दीप की
कुल कपूत गति सोई।
बारे उजियारो करे
बढ़े अँधेरों होई।
उदाहरण:
उषा सुनहले तीर
बरसती जय लक्ष्मी-
सी उदित हुई।
उदाहरण:
पायोजी मैंने राम-रतन
धन पायो।
उदाहरण:
साेहत ओढ़े पीत पट
श्याम सलोने गात।
मनहुँ नीलमणि शैल पर
आतप पर्यो परभात।।
shaalaa.com
व्याकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.08: हिरणी (पूरक पठन) - स्वाध्याय [पृष्ठ ३७]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.08 हिरणी (पूरक पठन)
स्वाध्याय | Q (१) | पृष्ठ ३७

संबंधित प्रश्‍न

क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है तो उसे अन्विति कहते हैं।
क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे- सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया, कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)

अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-

  1. घोड़ा पानी पी रहा था।
  2. बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
  3. रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
  4. देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

वह तटस्थ होकर अपने विचार रखता है।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए :

तुमने मीट्टी से का प्यार।


सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध, विनती के वाक्य विरामचिह्‌न सहित पढ़ो और समझो :

‘चंदामामा’ बालपत्रिका पढ़ो।


कविता (तूफानों से क्या डरना) में आए किन्हीं पॉंच शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखो।


पढ़ो :

हल लगाकर जुड़ें हम

सिद्धू   द्वार 
लड्डू  खट्टा 
बाह्य वाङ्मय

ज़रूरत-भर जीरा वहाँ से ले लिया कि फिर सारा चौक उनके लिए आसानी से नहीं के बराबर हो जाता है- भगत जी की इस संतुष्ट निस्पृहता की कबीर की इस सूक्ति से तुलना कीजिए-
 
चाह गई चिता महँ, मनुआँ बेपरवाहा
जाको कछु नहि चाहिए, सोइ साहन के सतह।।
-कबीर

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ अपमान ×

निम्‍नलिखित मुहावरा, कहावत में गलत शब्‍द के स्‍थान पर सही शब्‍द लिखकर उन्हें पुनः लिखिए:

नाक की किरकिरी होना


निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के लिए सही शब्द का चयन कीजिए:

संकट की घड़ी में ऋण प्रदान करने के लिए श्रीलंका, विश्वबैंक का कृतघ्न है।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×