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प्रश्न
कविता के दूसरे चरण का भावार्थ लिखिए।
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उत्तर
कवि के अनुसार, हमें फूलों भरे रास्ते का चुनाव नहीं करना चाहिए और वृक्षों की छाया से भी बचना चाहिए। राह में आने वाले कांटे, यानी मुश्किलें, हमारे डर को खत्म करते हैं, क्योंकि सुख और सुविधा में पले-बढ़े लोग मुश्किलें आते ही अपनी मंजिल को बदल लेते हैं। जब हम छाया का त्याग करके तपती धूप में चलते हैं, तो हमारे व्यक्तित्व में निखार आता है। कवि मानते हैं कि संघर्ष का पथ ही व्यक्ति को साहसी और वीर बनाता है।
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भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
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