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अभिकथन - विद्युत् अपघट्य विलयन को तनुकृत करने पर दुर्बल विद्युत् अपघट्यों के Λm के मान में तीव्र वुद्ध होती है।

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प्रश्न

अभिकथन - विद्युत् अपघट्य विलयन को तनुकृत करने पर दुर्बल विद्युत् अपघट्यों के Λm के मान में तीव्र वुद्ध होती है।

तर्क - दुर्बल विद्युत् अपघट्यों के विलयन की तनुता बढाने से उनके वियोजन की मात्रा बढ़ती है।

पर्याय

  • अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं और तर्क अभिकथन कों सही स्पष्टीकरण है।

  • अभिकथन और तर्क दोनों सही कथन हैं परन्तु तर्क अभिकथन का स्पष्टीकरण नहीं है।

  • अभिकथन सही है परन्तु तर्क गलत कथन है।

  • अभिकथन और तर्क दोनों ही गलत कथन हैं।

  • अभिकथन गलत है परन्तु तर्क सही कथन है।

MCQ
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उत्तर

अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं और तर्क अभिकथन कों सही स्पष्टीकरण है।

स्पष्टीकरण -

वील विद्युत-अपघट्य की मोलर चालकता तनुता बढ़ने के साथ बढ़ती है क्योंकि जब हम तनुता की मात्रा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जल डालते हैं तो पृथक्करण की डिग्री बढ़ जाती है इसलिए विलयन में आयनों की संख्या बढ़ जाती है। इस प्रकार दुर्बल विद्युत-अपघट्य की मोलर चालकता बढ़ जाती है।

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वैद्युत अपघटनी विलयनों का चालकत्व
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 3: विद्युत् रसायन - अभ्यास [पृष्ठ ४३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Rasayan Vigyaan [Hindi] Class 12
पाठ 3 विद्युत् रसायन
अभ्यास | Q V. 59. | पृष्ठ ४३

संबंधित प्रश्‍न

`∧_("m"("NH"_4"OH"))^0` ______ के बराबर होगा।


प्लेटिनम इलेक्ट्रोड की उपस्थिति में CuSO4 के जलीय विलयन का विद्युत् अपघटन करने पर क्या होगा? 

(i) कैथोड पर कॉपर निक्षपित होगा।

(ii) ऐनोड पर कॉपर निक्षिपित होगा।

(iii) ऐनोड पर ऑक्सीजन निकलेगी।

(iv) ऐनोड पर कॉपर घुलेगा।


आयनिक विलयन की मोलर चालकता ______ निर्भर करती है।

  1. ताप पर
  2. इलेक्ट्रोडों के मध्य की दूरी पर
  3. विलयन में विद्युत् अपघट्यों की सांद्रता पर
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किसी विद्युत् अपघटनी विलयन के प्रतिरोध के मापन में प्रत्यावर्ती धारा का प्रयोग क्यों किया जाता है?


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कॉलम I तथा कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।

कॉलम I कॉलम II
(i) Λm (a) मात्राविहीन गुण
(ii) `"E"_"cell"^⊖` (b) आयनों की संख्या/आयतन पर निर्भर
(iii) κ (c) विस्तीर्ण गुण
(iv) ΔrG (d) तनुता के साथ बढ़ता है

निम्नलिखित आँकडों के आधार पर कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।

`"E"_("F"_2//"F"^-)^⊖` = 2.87 V, `"E"_("Li"^+//"Li")^⊖` = - 3.5 V, `"E"_("Au"^(3+)//"Au")^⊖` = 1.4 V, `"E"_("Br"^2//"Br"^-)` = 1.09 V

कॉलम I कॉलम II
(i) F2 (a) धातु प्रबलतम अपचायक है
(ii) Li (b) धातु आयन जो दुर्बलतम ऑक्सीकरण कर्मक है
(iii) Au3+ (c) अधातु जो कि उत्तम ऑक्सीकरण कर्मक है
(iv) Br- (d) अक्रिय धातु
(v) Au (e) ऋणायन जो कि Au3+ द्वारा ऑक्सीकृत किया जा
(vi) Li+ (f) ऋणायन जो दुर्बलतम अपचयन कर्मक है
(vii) F- (g) धातु आयन जो कि ऑक्सीकरण कर्मक है

अभिकथन - NaCl विलयन का विद्युत् अपघटन O2 के बजाए ऐनोड पर क्लोरीन देता है।

तर्क - ऐनोड पर ऑक्सीजन बनने के लिए अधिवोल्टता चाहिए।


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