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प्रश्न
आशय स्पष्ट कीजिए।
अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।
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उत्तर
प्रसंग - उपरोक्त पक्तियों में कवी घनानंद द्वारा वियोगावस्था का मार्मिक चित्रण किया गया है।
व्याख्या - अपनी प्रेयसी सुजान की प्रतीक्षा में बेसब्र, प्रतीक्षा करते-करते मरणासन्न दशा में है। प्रेमी के प्राण काफी समय से कृष्ण का इंतजार कर रहे हैं। ये हड़बड़ाहट में हैं। कृष्ण के आने की बात सुनकर ये रुके हुए थे, परंतु अब इनका विश्वास कृष्ण से उठ गया हैं। ये प्राण होठों तक पहुँच गए हैं और सुजान का संदेश पाकर चलना चाहते हैं।
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