Advertisements
Advertisements
प्रश्न
A + B →उत्पाद, अभिक्रिया के लिए वेग नियम है - दर = k [A] [B]3/2। क्या यह अभिक्रिया एक प्रारंभिक अभिक्रिया है? समझाइए।
Advertisements
उत्तर
एक प्राथमिक अभिक्रिया के दौरान, अभिक्रिया करने वाले अणुओं की संख्या को आण्विकता कहते हैं। यदि यह प्राथमिक अभिक्रिया होती तो B के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि एक होनी चाहिए. थी, परन्तु दिए गए वेग व्यंजक में B के संदर्भ में यह `3/2` है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि अभिक्रिया प्राथमिक अभिक्रिया नहीं है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
एक अभिक्रिया \[\ce{A + B → {उत्पाद}}\], के लिए वेग नियम `r = k[A]^(1/2)[B]^2` से दिया गया है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
अणु X का Y में रूपांतरण द्वितीय कोटि की बलगतिकी के अनुरूप होता है। यदि X की सांद्रता तीन गुनी कर दी जाए तो Y के निर्माण होने के वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
निम्नलिखित अभिक्रिया के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए।
\[\ce{CH3CHO_{(g)} -> CH4_{(g)} + CO_{(g)}}\] वेग = k [CH3CHO]3/2
निम्नलिखित अभिक्रिया के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए।
\[\ce{H2O2_{( aq)} + 3I^-_{( aq)} + 2H^+ -> 2H2O_{(l)} + I^-_3}\] वेग = k [H2O2] [I–]
किसी अभिक्रियक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा, यदि अभिक्रियक की सांद्रता दुगुनी कर दी जाए?
किसी भी एक-अणुक अभिक्रिया के लिए ______।
- दर निर्धारण चरण में केवल एक अभिकारी स्पीसीज प्रयुक्त होती है।
- सबसे धीमे चरण की कोटि तथा आण्विकता एक के बराबर होती है।
- अभिक्रिया की आण्विकता एक होती है और कोटि शून्य होती है।
- अभिक्रिया की आण्विकता और कोटि दोनों ही एक होती हैं।
एक जटिल अभिक्रिया के लिए ______।
- समग्र अभिक्रिया की कोटि सबसे धीमे पद् की आण्विकता के समान होती है।
- समग्र अभिक्रिया की कोटि सबसे धीमे पद् की आण्विकता से कम होती है।
- समग्र अभिक्रिया की कोटि सबसे धीमे पद् की आण्विकता से अधिक होती है।
- सबसे धीमे पद की आण्विकता कभी भी शून्य अथवा अपूर्णांक नहीं होती।
निम्नलिखित का सुमेलन कीजिए-
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) हीरा (डायमण्ड) | (a) समय का लघु अंतराल |
| (ii) तार्क्षणिक वेग | b) सामान्यत: परिवर्तन का वेग परिलक्षित नहीं होता। |
| (iii) औसत वेग | (c) लंबी समयावधि |
अभिकथन - अर्रेनिअस समीकरण से सामान्य तथा जटिल अणुओं के लिए निर्धारित वेग स्थिरांक लगभग परिशुद्ध होते हैं।
तर्क - संघट्ट के समय अभिक्रियक अणुओं का कोई भी अभिविन्यास होने पर भी रासायनिक परिवर्तन हो जाता है।
एक अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है। A तथा B दोनों की सांद्रता दुगुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
