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SSC (Marathi Medium) १० वीं कक्षा - Maharashtra State Board Question Bank Solutions

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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सितारे छिपे
बादलों की ओट में
सूना आकाश।

तुमने दिए
जिन गीतों को स्‍वर
हुए अमर।

सागर में भी
रहकर मछली
प्यासी ही रही।

(1) तालिका पूर्ण कीजिए: (2)

  स्थिति निवास स्थान
मछली ______ ______
सितारे ______ ______

(2) ‘रात में सितारे आकाश की शोभा बढ़ाते हैं’ अपने विचार लिखिए। (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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अधोरेखांकित शब्द का भेद पहचानकर लिखिए:

उस आश्रम का विज्ञापन अखबार में नहीं दिया जाए।

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित शब्द का प्रयोग अपने वाक्य में कीजिए:

‘आलीशान’

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

तिवारी जी: नागर जी, मैं आपको आपके लेखन के आरंभ काल की ओर ले चलना चाहता हूँ। जिस समय आपने लिखना शुरू किया, उस समय का साहित्यिक माहौल कया था? किन लोगों से प्रेरित होकर आपने लिखना शुरू किया और क्या आदर्श थे आपके सामने?
नागर जी: लिखने से पहले तो मैंने पढ़ना शुरू किया था। आरंभ में कवियों को ही अधिक पढ़ता था। सनेहीं जी, अयोध्यासिंह उपाध्याय की कविताएँ ज्यादा पढ़ीं। छापे का अक्षर मेरा पहला मित्र था। घर में दो पत्रिकाएँ मँगातें थे मेरे पितामह। 'एक “सरस्वती ' और दूसरी 'गृहलक्ष्मी'। उस समय हमारे सामने प्रेमचंद का साहित्य था, कौशिक का था।आरंभ में बंकिम के उपन्यास पढ़े। शरतचंद्र को बाद में। प्रभातकुमार मुखोपाध्याय का कहानी संग्रह ' देशी और विलायती' १९३० के आसपास पढ़ा। उपन्यासों में बंकिम के उपन्यास १९३० में ही पढ़ डाले। 'आनंदमठ', 'देवी चौधरानी' और एक राजस्थानी थीम पर लिखा हुआ उपन्यास, उसी समय पढ़ा था। 
तिवारी जी: कया यही लेखक आपके लेखन के आदर्श रहे ? 
नागर जी: नहीं, कोई आदर्श नहीं। केवल आनंद था पढ़ने का। सबसे पहले कविता फूटी साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में । लाठीचार्ज हुआ था। इस अनुभव से ही पहली कविता फूटी.' कब लौं कहाँ लाठी खाय'। इसे ही लेखन का आरंभ मानिए।

(1) नाम लिखिए-     (2)

(i)

(ii)

(2) लिखिए-     (2)

  1. लेखक ने शुरू में इन्हें पढ़ा ______।
  2. नागर जी के सामने इनका साहित्य था ______।

(3) गद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए-    (2)

  1. लिंग परिवर्तन
    1. पितामही - ______
    2. सहेली - ______
  2. परिच्छेद से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।

(4) 'वाचन व्यक्ति विकास का सोपान है' अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
Chapter: [2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
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निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

जहाँ कोयल की मीठी वाणी सबका मन मोह लेती है, वहीं कौए को कर्कश आवाज किसी को अच्छी नहीं लगती । मधुर वचन न केवल सुनने वाले को, बल्कि बोलने वाले को भी आत्मिक शांति प्रदान करतें हैं। मनुष्य अपनी सद्भावनाओं का अधिकांश प्रदर्शन वचनों द्वारा ही करता है। मधुर वचन तप्त और दुःखी व्यक्ति का सही और सच्चा उपचार हैं। सहानुभूति के कुछ शब्द उसे इतना सुख देते हैं जितना संसार का कोई धनकोष नहीं दे पाता। मधुरभाषी शीघ्र ही सबका मित्र बन जाता है। लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। यहाँ तक कि पराए भी अपने बन जाते हैं। इससे समाज में पारस्परिक सौहार्द की भावना पैदा होती है, लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और श्रद्धा का आधार भी मधुर वाणी ही है। मधुर वचन किसी के मन को ठेस नहीं पहुँचाते, बल्कि दूसरे के क्रोध को शांत करने में सहायक होते हैं। मधुर वाणी में ऐसा आकर्षण है जो बिना रस्सी के सबको बाँध लेती है। अतः याद रखना चाहिए-

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए।
औरन को सीतल करे, आपहूँ सीतल होए॥

(1) उत्तर लिखिए-    (2)

गद्यांश के आधार पर मधुर वचन की विशेषताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) “शब्द शस्त्र के समान होते हैं उनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए" वचन पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

बिना मजदूरी के पेट भर भात पर काम करने वाला कारीगर ! दूध में कोई मिंठाई न मिले तो कोई बात नहीं किन्तु बात में जरा भी झाला बह नहीं बरदाश्त कर सकता। 

'सिरचन को लोक चटोर भी समझते हैं। तली बघारी हुई तरकारी, दही की कढ़ी , मलाईवाला दूध, इन सबका प्रबंध पहले कर लो, 'तब सिरचन को बुलाओ, दुम हिलाता हुआ हाजिर हो जाएगा। खाने-पीने में चिकनाई की कमी हुई कि काम की सारी चिकनाई खत्म ! काम अधूरा रखकर उठ खड़ा होगा- 'आज तो अब अधकपाली दर्द से माथा टनटना रहा हैं थोड़ासा रह गया है, किसी दिन आकर पूरा कर दूँगा।'' किसी दिन' माने कभी नहीं! 

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें'सिरचन के सिवा गाँव में ओर कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग। बेकामका काम जिसकी मजदूरी में अनाज या पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। पेट भर खिला दो, काम पूरा होने पर एकाध पूराना- धुराना कपड़ादेकर विदा करो। वह कुछ भी नहीं बोलेगा।....

(1) लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित सिरचन की पसंद की चीजें-

  1. ____________
  2. ____________

(2) 'हस्तकला को बढ़ावा मिलना चाहिए' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

अजी क्या कहिए, हाँ क्या कहिए।
जिस मिट्टी में लक्ष्मीबाई जी, जनमी थीं झाँसी की रानी।
रजिया सुलताना, दुर्गावती, जो खूब लड़ी थीं मर्दानी।
जनमी थी बीबी चाँद जहाँ, पद्मिनी के जौहर की ज्वाला।
सीता, सावित्री की धरती, जनमी ऐसी-ऐसी बाला।
गर डींग जनाब उड़ाएँगे, तो मजबूरन ताने सहिए, ताने सहिए, ताने सहिए।
हम उस धरती की लड़की हैं...
यों आप खफा क्यों होती हैं, टंटा काहे का आपस में।
हमसे तुम या तुमसे हम बढ़-चढ़कर क्या रक्खा इसमें।

(1) सूचनानुसार लिखिए-  (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें लड़ाई का संदर्भ है।
    __________________
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें जौहर का संदर्भ हैं।
    __________________

(2) 'देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
Chapter: [2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

'एक दिन तुम्हारे बाबू जी ने दुनिया की मुसीबतों और मनुष्य की मजबूरियों को समझते हुए जब हमसे गहनों की माँग की तों क्षण भर के लिए हमें कुछ वैसा लगा और गहना देने में तनिक हिचकिचाहट महसूस हुई, पर यह सोचा कि उनकी प्रसन्नता में हमारी खुशी है, हमने गहने दे दिए। केवल टीका, नथुनी, बिछिया, नथ रख लिए थे। वे हमारे सुहाग वाले गहने थे। उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, पर दूसरे दिन वे अपनी पीड़ा न रोक सके। कहने लगे- “तुम जब मिर्जापुर जाओगी और लोग गहनों के संबंध पूछेंगे तो क्या कहोगी ?

(1) नाम लिखिए -     (2)

(i)

(ii)

(2) 'पीड़ा' शब्द के दो समानार्थी शब्द लिखिए -   (2)

  1. ______
  2. ______

(3) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए-    

  1. प्रत्यययुक्तं शब्द -   (1)

    1. ______
    2. ______
  2. ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता -  (1)
    1. ______
    2. ______

(4) बाबू जी की चरित्रगत विशेषताओं पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार प्रकट करें।  (2)

[2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
Chapter: [2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आश्रम किसी एक धर्म से चिपका नहीं होगा। सभी धर्म आश्रम को मान्य होंगे, अत: सामान्य सदाचार, भक्ति तथा सेवा का ही वातावरण रहेगा। आश्रम में स्वावलंबन हो सके उतना ही रखना चाहिए। सादगी का आग्रह होना चाहिए। आरम्भ में उद्योग या पढ़ाई की व्यवस्था भले ही न हो सके, लेकिन आगें चलकर उपयोगी उद्योग सिखाए जाएँ, पढ़ाई भी आसान हों। आश्रम शिक्षा संस्था नहीं होगी, लेकिन कलह और कुढ़न से मुक्त स्वतन्त्र वातावरण जहाँ हो ऐसा मानवतापूर्ण आश्रय स्थान होगा, जहाँ परेशान महिलाएँ बेखटके अपने 'खर्च से रह सकें और अपने जीवन का सदुपयोग पवित्र सेवा में कर सकें। ऐसा आसान आदर्श रखा हो और व्यवस्था पर समिति का झंझट न हो तो बहुत सुंदर तरीके से चला सके ऐसा एक बड़ा काम होंगा। उनके उपर ऐसा बोझ नहीं आएगा जिससे कि उन्हें परेशानी हो।

(1) आकृति पूर्ण कीजिए-     (2)

(2) उत्तर लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित आश्रम की विशेषताएँ:

  1. ______
  2. ______

(3) (i) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में प्रयुक्त विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए-    (1)

  1. सदुपयोग - ______
  2. सादगी - ______

(ii) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-   (1)

  1. किसी संस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए गठित संगठन - ______
  2. अपना काम स्वयं करना - ______

(4) अपने देखे हुए किसी आश्रम की व्यवस्था पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)

[2.07] महिला आश्रम
Chapter: [2.07] महिला आश्रम
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आज संपूर्ण विश्व में एक धर्म दूसरे धर्म का दुश्मन बन बैठा है। धर्म का उद्देश्य सिर्फ मानवता की रक्षा करना है। कर्म, भक्ति, ज्ञान इनके त्रिरत हैं। इनमें से किसी एक के न होने पर धर्म को सही अर्थ में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। आज धर्म के नाम पर विभाजन, संप्रदायवाद, सामाजिक बैर आम हैं। धर्म किसी से बैर करना नहीं सिखाता। धर्म सिर्फ जोड़ता है। धर्म का आश्रय लेकर आज कुछ स्वार्थी लोग कुछ लोगों को पथश्रष्ट कर रहे हैं। हमें कबीर की उक्ति हमेशा याद रखनी चाहिए-

'कांकड़ पाथर जोड़ के मस्जिद लयी बनाय।।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।

(1) उत्तर लिखिए-

धर्म की विशेषताएँ लिखिए।     (2)

  1. ____________
  2. ____________

(2) धर्म विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए-  (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

यह बताओ तुम्हारे नोट कहाँ हैं ?
परीक्षा से एक महीने पहले करूँगा तैयार
वे गरजकर बोले, हमारा मतलब आपकी मुद्रा से है
मैं लरज कर बोला,
मुद्राए आप मेरे मुख पर देख लीजिए,
वे खड़े होकर कुछ सोचने लगे
'फिर शयन कक्ष में घुस गए
और फटे हुए तकिये की रुई नोचने लगे
उन्होंने टूटी अलमारी को खोला
रसोई की खाली पीपियों को टटोला
बच्चों की गुल्लक तक देख डाली
पर सब में मिला एक ही तत्व खाली:
'कनस्तरों को, मटकों को ढूँढा सब में मिला शुन्य-ब्रह्मांड ।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए।   (2)

(2) (i) ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हो-   (1)

  1. गरजना - ______
  2. सिक्का - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए-  (1)

बच्चों की गुल्लक तक देख डाली।

(3) प्रस्तृत हास्य-व्यंग्य का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए ।  (2)

[2.04] छापा
Chapter: [2.04] छापा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

        उस दिन शाम के वक्‍त झील किनारे टहल रहे थे। एक भुट्‌टेवाला आया और बोला- ‘‘साब, भुट्‌टा लेंगे। गरम-गरम भूनकर मसाला लगाकर दूँगा। सहज ही पूछ लिया- ‘‘कितने का है?’’ ‘‘पाँच रुपये का।’’ क्‍या? पाँच रुपये में एक भुट्‌टा। हमारे शहर में तो दो रुपये में एक मिलता है, तुम तीन ले लो।’’ ‘‘नहीं साब, ‘‘पाँच से कम में तो नहीं मिलेगा ...’’ ‘‘तो रहने दो ...’’ हम आगे बढ़ गए।’’ एकाएक पैर ठिठक गए और मन में विचार उठा कि हमारे जैसे लोग पहाड़ों पर घूमने का शौक रखते हैं, हजारों रुपये खर्च करते हैं, अच्छे होटलों में रुकते हैं जो बड़ी दूकानों में बिना दाम पूछे खर्च करते हैं, पर गरीब से दो रुपये के लिए झिक-झिक करते हैं, कितने कंगाल हैं हम! उल्‍टे कदम लौटा और बीस रुपये में चार भुट्‌टे खरीदकर चल पड़ा अपनी राह। मन अब सुकून अनुभव कर रहा था।

(1) नाम लिखिए- (2)

(i) 

(ii)

(2) लिखिए- (2)

  1. महत्वपूर्ण जगह का नाम।
  2. लेखक ने बीस रुपये में कितने भुट्‌टे खरीदे।

(3) गद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए- (2)

(i) प्रत्यययुक्त शब्द: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता है- (1)

  1. ______
  2. ______

(4) फुटपाथ पर सामान बेचने वाले की दशा पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.02] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
Chapter: [2.02] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दीख पड़े थे। वह सोचने लगी-हाय! कितनी निर्दयी हूँ। जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान ! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो ! आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इंशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए, परन्तु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाए, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी । केवल इसी कारण कि, वह वृद्धा असहाय है।

(1) लिखिए -  (2)

गद्यांश में उल्लेखित रूप की मानसिकताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) रूपा की चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर 25 - 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)

[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

करते जाओ
पाने की मत सोचो
जीवन सारा।

जीवन नैया
मैंझधार में डोले,
सँभाले कौन ?

रंग-बिरंगे
रंग-संग लेकर
आया फागुन।

काँटों के बीच
खिलखिलाता फूल
देता प्रेरणा।

(1) सूचनानुसार लिखिए-   (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें शिक्षा है - ______
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें प्रेरणा है - ______

(2) कर्म ही जीवन है, अपने विचार 25 - 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है।

            परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है-

रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव।
देख पराई चूपड़ी यह ललचावै जीव।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप

  1. ______
  2. ______

(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाई

लछमन जैसी चौकी देकर जिन काँटों ने जान बचाई

इनको पहिला हक आता है चाहे मुझको नोचें-तोड़ें

चाहे जिस मालिन से मेरी पँखुरियों के रिश्ते जोड़ें

ओ मुझपर मँड़राने वालो मेरा मोल लगाने वालो

जो मेरा संस्‍कार बन गई वो सौगंध नहीं बेचूँगा।

अपनी गंध नहीं बेचूँगा।।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए- (2)

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए- (1)

  1. गंध - ______
  2. हक - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए- (1)

मेरा मोल लगाने वालो।

(3) प्रस्तुत पद्यांश की किन्हीं दो पंक्तियों का भावार्थ लिखिए- (2)

[2.08] अपनी गंध नहीं बेचूँगा
Chapter: [2.08] अपनी गंध नहीं बेचूँगा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्‍सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्‍तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें सिरचन के सिवा गाँव में और कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग।

(1) लिखिए- (2)

ग्रामीण समाज की हस्तनिर्मित वस्तुएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) ग्रामीण हस्तकला पर 25-30 शब्दों में प्रकाश डालिए। (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

             हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है-

रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय।
सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहैं कोय।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

समाज में लोगों की विशेषताएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

वे गरजकर बोले, हमारा मतलब आपकी मुद्रा से है

मैं लरजकर बोला,

मुद्राएँ आप मेरे मुख पर देख लीजिए,

वे खड़े होकर कुछ सोचने लगे

फिर शयन कक्ष में घुस गए

और फटे हुए तकिये की रूई नोचने लगे

उन्होंने टूटी अलमारी को खोला

रसोई की खाली पीपियों को टटोला

बच्चों की गुल्‍लक तक देख डाली

पर सब में मिला एक ही तत्‍त्‍व खाली...

कनस्‍तरों को, मटकों को ढूॅंढ़ा सब में मिला शून्य-ब्रह्मांड

देखकर मेरे घर में ऐसा अरण्यकांड

उनका खिला हुआ चेहरा मुरझा गया

और उनके बीस सूची हृदय में

रौद्र की जगह करुण रस समा गया,

वे बोले, क्षमा कीजिए, हमें किसी ने गलत सूचना दे दी

अपनी असफलता पर वे मन ही मन पछताने लगे।

(1) पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए- (2)

(i) तकिया गुल्लक
(ii) बच्चों शून्य
    रूई
  1. ______
  2. ______

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए- (1)

  1. मुद्रा -
  2. टटोला - 
  3. सूचना - 
  4. असफलता -

(ii) पद्यांश में आए ‘मुद्रा’ शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए- (1)

  1. ______
  2. ______

(3) अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.04] छापा
Chapter: [2.04] छापा
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           मानू पान सजाकर बाहर बैठकखाने में भेज रही थी। चुपके से पान का एक बीड़ा सिरचन को देती हुई इधर-उधर देखकर बोली ‘‘सिरचन दादा, काम-काज का घर! पाँच तरह के लोग पाँच किस्‍म की बात करेंगे। तुम किसी की बात पर कान मत दो।’’ सिरचन ने मुस्‍कराकर पान का बीड़ा मुँह में ले लिया। चाची अपने कमरे से निकल रही थी। सिरचन को पान खाते देखकर अवाक् हो गई। सिरचन ने चाची को अपनी ओर अचरज से घूरते देखकर कहा, ‘‘छोटी चाची, जरा अपनी डिबिया का गमकौआ जर्दा खिलाना। बहुत दिन हुए ...।’’

           चाची कई कारणों से जली-भुनी रहती थी सिरचन से। गुस्‍सा उतारने का ऐसा मौका फिर नहीं मिल सकता। झनकती हुई बोली, ‘‘तुम्‍हारी बढ़ी हुई जीभ में आग लगे। घर में भी पान और गमकौआ जर्दा खाते हो?... चटोर कहीं के!’’ मेरा कलेजा धड़क उठा... हो गया सत्‍यानाश! बस, सिरचन की उँगलियों में सुतली के फंदे पड़ गए। मानो, कुछ देर तक वह चुपचाप बैठा पान को मुँह में घुलाता रहा फिर अचानक उठकर पिछवाड़े पीक थूक आया। अपनी छुरी, हँसिया वगैरह समेट-सँभालकर झोले में रखे। टँगी हुई अधूरी चिक पर एक निगाह डाली और हनहनाता हुआ आँगन से बाहर निकल गया।

(1) लिखिए- (2)

मोनू ने सिरचन से क्या कहा?

  1. ______
  2. ______

(2) सिरचन ने अपनी बेइज्जती महसूस करने के बाद क्‍या कदम उठाया? इस विषय पर 25-30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined
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