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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
| 'एक दिन तुम्हारे बाबू जी ने दुनिया की मुसीबतों और मनुष्य की मजबूरियों को समझते हुए जब हमसे गहनों की माँग की तों क्षण भर के लिए हमें कुछ वैसा लगा और गहना देने में तनिक हिचकिचाहट महसूस हुई, पर यह सोचा कि उनकी प्रसन्नता में हमारी खुशी है, हमने गहने दे दिए। केवल टीका, नथुनी, बिछिया, नथ रख लिए थे। वे हमारे सुहाग वाले गहने थे। उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, पर दूसरे दिन वे अपनी पीड़ा न रोक सके। कहने लगे- “तुम जब मिर्जापुर जाओगी और लोग गहनों के संबंध पूछेंगे तो क्या कहोगी ? |
(1) नाम लिखिए - (2)
(i)

(ii)

(2) 'पीड़ा' शब्द के दो समानार्थी शब्द लिखिए - (2)
- ______
- ______
(3) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए-
-
प्रत्यययुक्तं शब्द - (1)
- ______
- ______
- ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता - (1)
- ______
- ______
(4) बाबू जी की चरित्रगत विशेषताओं पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार प्रकट करें। (2)
संक्षेप में उत्तर
सारिणी
एक शब्द/वाक्यांश उत्तर
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उत्तर
(1) (i)

(ii)

(2)
- दुःख
- तकलीफ
(3) (i)
- हिचकिचाहट
- प्रसन्नता
(ii)
- ख़ुशी
- पीड़ा
(4) बाबूजी एक दयालु व्यक्ति थे। किसी भी मनुष्य को पीड़ित देखकर उसका मन विचलित हो जाता था। वह सबकी समान रूप से सहायता करते थे। उन्हें मानव जाति पर बड़ा गर्व था। वे स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों को सुख देना अपना परम कर्तव्य समझते थे।
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ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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