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Commerce (English Medium) कक्षा १२ - CBSE Question Bank Solutions for Hindi (Core)

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Hindi (Core)
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अस्थिर सुख पर दुख की छाया पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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‘विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते’ पंक्ति में ‘विप्लव-रव’ से क्या तात्पर्य है? ‘छोटे ही हैं शोभा पाते’ ऐसा क्यों कहा गया है?
[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है?

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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व्याख्या कीजिये

तिरती है समीर-सागर पर
अस्थिर सुख पर दुख की छाया-
जग के दग्ध हृदय पर
निर्दय विप्लव की प्लावित माया-

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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व्याख्या कीजिये

अट्टालिका नहीं है रे
आतंक-भवन
सदा पंक पर ही होता
जल-विलप्व-प्लावन

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको कविता का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों?
[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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इस कविता में बादल के लिए ऐ विप्लव के वीर!, ऐ जीवन के पारावार! जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। बादल राग कविता के शेष पाँच खड़ों में भी कई संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। जैसे- अरे वर्ष के हर्ष!, मेरे पागल बादल!, ऐ निर्बंध!, ऐ स्वच्छंद!, ऐ उद्दाम!, ऐ सम्राट!, ऐ विप्लव के प्लावन!, ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार!, उपर्युक्त संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएँ कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य है?

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।
[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख। सुख के साथ अस्थिर विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?
[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
Chapter: [8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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टिप्पणी करें

गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता।

[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
Chapter: [8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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