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प्रश्न
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उत्तर
महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने संपूर्ण कविता में प्रकृति का अत्यंत सुंदर और अनुपम मानवीकरण किया है। विशेष रूप से-
हँसते हैं छोटे पौधे लघु भार शस्य अपार,
हिल-हिल, खिल-खिल, हाथ हिलाते, तुझे बुलाते, तुझे बुलाते,
विप्लव रव से छोटी ही है शोभा पाते।
इन पंक्तियों में कवि ने छोटे-छोटे पौधों को बच्चों के रूप में चित्रित किया है। जिस प्रकार बच्चे प्रसन्न होकर हँसते हैं, उछलते-कूदते हैं, हाथ हिलाते हैं तथा अपने माता-पिता को पुकारते हैं, उसी प्रकार के सभी स्वाभाविक और आकर्षक मानवीय भावों को कवि ने पौधों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। बच्चों की चंचलता, उल्लास, मुस्कान और स्नेहपूर्ण पुकार का अत्यंत सजीव चित्रण पौधों में दिखाई देता है। पौधों का यह मानवीकरण पाठकों के हृदय को गहराई से स्पर्श करता है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि कवि ने अत्यंत सरल और सहज भाषा में इस मानवीकरण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
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‘बादल राग’ कविता के आधार पर भाव स्पष्ट कीजिए - "विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते।"
