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Academic Year: 2025-2026
Date & Time: 2nd March 2026, 10:30 am
Duration: 3h
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सामान्य निर्देश:
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख़्ती से अनुपालन कीजिए:
- इस प्रश्न-पत्र में कुल 15 प्रश्न हैं। सभी प्रस्न अनिवार्य हैं।
- इस प्रश्न-पत्र में कुल चार खण्ड हैं - खण्ड क, ख, ग और घ।
- खण्ड क में कुल 2 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 10 है।
- खण्ड ख में कुल 4 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 20 है।
- खण्ड ग में कुल 5 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 21 है।
- खण्ड घ में कुल 4 प्रश्न हैं।
- प्रश्न-पत्र में समग्र विकल्प नहीं दिया गया है। यद्यपि, कुछ खण्डों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं, दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- यथासंभव सभी खण्डों के उत्तर क्रमशः लिखिए।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए:
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हमारी सभ्यताएँ आमतौर पर नदियों के किनारे ही फली-फूलीं, लेकिन जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी तो उन्हें नदियों से दूर जाकर बसना पड़ा, पर वहाँ भी उन्होंने तालाब बनाए। इन तालाबों की खासियत यह रही कि ये मनुष्यों के साथ-साथ नदियों को भी पोषित करते रहे थे और मानवता को भी पोषित करते थे, क्योंकि तालाबों में भरा पानी नदी के पेट को भरकर नदी को प्रवाह देता था। इसके बाद फिर जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी, तो हमने कुएँ बनाए, बावड़ियाँ बनाईं। इस तरह जैसे-जैसे मनुष्य को जलस्रोत से दूर जाना पड़ा तो उसने तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ, ताल, झाल, पाल आदि बनाकर पानी का संरक्षण किया। इसी कारण हम पानीदार बने रहे, लेकिन जब भारत में अंग्रेज़ी शासक आए तो उन्होंने कहना शुरू किया कि - ‘यह तो सपेरों का देश है और ये ठहरा हुआ पानी पीते हैं। ठहरा हुआ पानी तो दूषित है।’ अंग्रेज़ यह बात नहीं जानते थे कि वर्षा जल शुद्ध और पवित्र होता है और जब वह इकट्ठा होता है तो वह सूर्य की किरणों और हवा के स्पर्श से शुद्ध होता रहता है। यह ज्ञान उन्हें नहीं था। राजस्थान में जो वर्षा का जल इकट्ठा होता था उसे हम ताज़ा पानी कहते थे और अगर किसी को पेट की बीमारी होती थी, तो हम उसी से उसका इलाज कर लिया करते थे। हमारे लिए जल सिर्फ़ जीवन देने वाला, जीवन चलाने वाला ही नहीं रहा, बल्कि उसकी एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमिका भी रही। हमारी कोई भी पूजा जल के बिना नहीं होती। जब कहीं घूमने या आनंद मनाने जाते हैं, तो नदी किनारे का और उसके बदलते रंगों का आनंद लेते हैं। पूरे दिन में नदी के तीन रंग बदलते हैं। सुबह का अलग, शाम का अलग और दोपहर का अलग। नदी के ये बदलते रंग हमारे जीवन के बदलते रंगों की तरह हैं जिनमें प्रवाह होता है, गति होती है। इस तरह पानी से हमें एक ‘जीवन दर्शन’ मिलता रहा जिसे हम ‘जल दर्शन’ कह सकते हैं। जब तक हमें यह मिलता रहा तब तक हम पानीदार बने रहे, लेकिन अब हमारा यह जल दर्शन शनैः शनैः मिट्टी में दबता जा रहा है। |
- हमारी सम्यताएँ नदियों के किनारे ही क्यों विकसित हुईं? [1]
- जल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण
- बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण
- आवागमन की सुविधा के कारण
- प्राकृतिक सौंदर्य के कारण
- जनसंख्या वृद्धि के साथ जलस्रोतों के विषय में क्या बदलाव आया है? [1]
- नदियों पर मनुष्यों की निर्भरता अधिक बढ़ी।
- वर्षा जल के लिए प्रतीक्षा रहने लगी।
- नदियों से बसावट दूर हुई और तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ आदि बनाए गए।
- पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने लगा और जलस्रोतों का पानी कम पड़ने लगा।
- निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए: [1]
कथन: हमारी कोई भी पूजा जल के बिना पूरी नहीं होती।
कारण: जल की मानव जीवन में एक आध्यात्मिक भूमिका रही है।
विकल्प:- कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
- कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
- जल से जीवन का कौन-सा दर्शन मिलता है? स्पष्ट उत्तर लिखिए। [2]
- “पानीदार होने” का गद्यांश के संदर्भ में क्या अर्थ है? हम किस प्रकार पानीदार बने रह सकते हैं? [2]
Chapter:
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए:
| तुम्हारे लगाए आम फल आये हैं बेटी घर आना तुम्हारी पाली बकरियों ने बच्चे दिए हैं बेटी घर आना घर आना कि अबकी बारिश में भरपूर फ़सल होने वाली है फूल रहा है सनई जमकर सेम में फलियाँ आई हैं अपनी शक्ति में यही भर है प्यार से बुलाती हूँ अपनी माँ को याद करना बेटी घर आना आँगन उदास है घर के चौखट तुम्हारा रस्ता देखते हैं आम, फ़सलें और पेड़-पशु सब कहानी है असल बात जो तुम्हैं बतानी है तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाते हैं पर कह नहीं पाते हैं अकेले में सिसकते हैं, बुदबुदाते हैं बेटी घर आना। |
- कविता में माँ बेटी को बार-बार बुला रही है इसका असल कारण है: [1]
- घर में अन्न, फल, मछलियाँ अधिक मात्रा में हैं।
- उसके किए कार्यों का फल दिखने लगा है।
- घर बेटी की अनुपस्थिति से बहुत सूना है।
- बेटी के पिता उसे बहुत अधिक याद कर रहे हैं।
- निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए: [1]
कथन: कविता में वर्णित परिवार ग्रामीण पृष्ठभूमि में निवास करता होगा।
कारण: आम, बकरियों, फसलें और सनई का उल्लेख ग्रामीण परिवेश का उचित संकेत दे रहा है।
विकल्प:- कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
- कारण ग़लत है, किंतु कथन सही है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
- कविता में माँ ने अपनी स्थिति के बारे में कौन-सी बातें कही हैं? इस प्रश्न के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए: [1]
I. विवशता से भरी
II. दीनता से भरी
III. असंतोष से भरी
विकल्प:- केवल I सही है।
- केवल I और III सही हैं।
- केवल II और III सही हैं।
- I, II और III तीनों सही हैं।
- ‘तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाते हैं, पर कह नहीं पाते हैं।’ आपके विचार से पिता पुत्री के प्रति अपने प्रेम को क्यों अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं? [2]
- ‘आँगन उदास है - घर के चौखट तुम्हारा रस्ता देखते हैं’ - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि बेटी की अनुपस्थिति का घर के परिवेश पर क्या प्रभाव है? [2]
Chapter:
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उनकी अँगुली धान के एक-एक पौधे को, पंक्तिबद्ध खेत में बिठा रही थी। (रचना की दृष्टि से वाक्य का भेद पहचानकर लिखिए)
Chapter:
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