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प्रश्न
यदि ऋणात्मक संख्याएँ नहीं होतीं तो निर्देशांक पद्धति कैसी होती? क्या इस पद्धति से द्वि-विमीय तल में सभी बिंदुओं को अंकित किया जा सकता था?
योग
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उत्तर
यदि ऋणात्मक संख्याएँ नहीं होतीं, तो निर्देशांक पद्धति में केवल धनात्मक संख्याएँ तथा शून्य का ही प्रयोग किया जा सकता था।
- x-अक्ष पर केवल मूलबिंदु के दाईं ओर स्थित बिंदुओं का अंकन संभव होता है।
- y-अक्ष पर केवल मूलबिंदु के ऊपर स्थित बिंदुओं का अंकन संभव होता है।
इस स्थिति में केवल निम्नलिखित बिंदुओं का अंकन किया जा सकता था:
- प्रथम चतुर्थांश के बिंदु,
- x-अक्ष के धनात्मक भाग के बिंदु,
- y-अक्ष के धनात्मक भाग के बिंदु तथा
- मूलबिंदु (0, 0)
किन्तु निम्नलिखित बिंदुओं का अंकन संभव नहीं होता:
- द्वितीय चतुर्थांश के बिंदु,
- तृतीय चतुर्थांश के बिंदु,
- चतुर्थ चतुर्थांश के बिंदु तथा
- x-अक्ष और y-अक्ष के ऋणात्मक भागों पर स्थित बिंदु।
अतः, यदि ऋणात्मक संख्याएँ नहीं होतीं, तो निर्देशांक पद्धति द्वारा द्वि-विमीय तल के सभी बिंदुओं का अंकन संभव नहीं होता। सभी बिंदुओं को निरूपित करने के लिए धनात्मक तथा ऋणात्मक दोनों प्रकार की संख्याओं का होना आवश्यक है।
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