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प्रश्न
उदाहरण देऊन पुढील संज्ञा स्पष्ट करा.
सेंद्रिय संयुगातील विषम अणू
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उत्तर
सेंद्रिय संयुगातील एक किंवा अधिक हायड्रोजन अणूच्या जागी या मूलद्रव्यांच्या अणूंचे प्रतियोजन होते व त्यामुळे कार्बनच्या चतुःसंयुजेची पूर्तता होते. हायड्रोजनला प्रतियोजी असणाऱ्या मूलद्रव्याचा विषम अणू असे करतात. काही वेळा हे विषम अणू एकटे नसतात तर विशिष्ट अशा अणुगटांच्या रूपात असतात. उदा.,
| रचनासूत्र |
विषम अणू |
|
\[\ce{–X (–Cl, Br, –l)}\] |
हॅलोजन |
|
\[\ce{–O– H}\] |
ऑक्सिजन |
|
\[\ce{–O–}\] |
ऑक्सिजन |
|
\[\ce{–NH2}\] |
नायट्रोजन |
| \[\begin{array}{cc} \ce{O}\\ ||\\ \ce{–C–} \end{array}\] |
ऑक्सिजन |
APPEARS IN
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जोड्या जुळवा.
| क्र. | 'अ' गट | 'ब' गट | |
| 1) | C2H6 | अ) | असंपृक्त हायड्रोकार्बन |
| 2) | C2H2 | ब) | एका अल्कोहोलचे रेणुसूत्र |
| 3) | CH4O | क) | संपृक्त हायड्रोकार्बन |
| 4) | C3H6 | ड) | तिहेरी बंध |
कार्बन अणूंच्या संयुजा कवचातील इलेक्ट्रॉन संख्या 4 असते.
