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प्रश्न
तनुता बढ़ाने पर CH3COOH के Λm का मान तेजी से क्यों बढ़ता है जबकि CH3COONa का Λm मान धीरे-धीरे से बढุता है?
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उत्तर
दुर्बल विद्युत अपघट्य और प्रबल विद्युत अपघट्य दोनों की मोलर चालकता तनुता पर बढ़ जाती है, लेकिन यह उस मात्रा में भिन्न होता है जिसमें यह बढ़ता है।
CH3COOH एक दुर्बल विद्युत अपघट्य है, जिसका अर्थ है तनुकरण पर वियोजन की मात्रा में वृद्धि के कारण संख्या की वृद्धि होती है।
\[\ce{CH3COOH + H2O ⇌ CH3COO^{-} (aq) + H3O^{+}}\]
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`"E"_("F"_2//"F"^-)^⊖` = 2.87 V, `"E"_("Li"^+//"Li")^⊖` = - 3.5 V, `"E"_("Au"^(3+)//"Au")^⊖` = 1.4 V, `"E"_("Br"^2//"Br"^-)` = 1.09 V
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) F2 | (a) धातु प्रबलतम अपचायक है |
| (ii) Li | (b) धातु आयन जो दुर्बलतम ऑक्सीकरण कर्मक है |
| (iii) Au3+ | (c) अधातु जो कि उत्तम ऑक्सीकरण कर्मक है |
| (iv) Br- | (d) अक्रिय धातु |
| (v) Au | (e) ऋणायन जो कि Au3+ द्वारा ऑक्सीकृत किया जा |
| (vi) Li+ | (f) ऋणायन जो दुर्बलतम अपचयन कर्मक है |
| (vii) F- | (g) धातु आयन जो कि ऑक्सीकरण कर्मक है |
अभिकथन - तनुता बढ़ाने पर सभी विद्युत् अपघट्यों की चालकता घटती है।
तर्क - तनुता बढ्डाने से प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घटती है।
अभिकथन - विद्युत् अपघट्य विलयन को तनुकृत करने पर दुर्बल विद्युत् अपघट्यों के Λm के मान में तीव्र वुद्ध होती है।
तर्क - दुर्बल विद्युत् अपघट्यों के विलयन की तनुता बढाने से उनके वियोजन की मात्रा बढ़ती है।
