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प्रश्न
समानार्थकशब्दं लिखत।
कृपणः - ______
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उत्तर
कृपणः - कदर्यः, क्षुद्रः, किंपचानः।
संबंधित प्रश्न
समानार्थकशब्दान् लिखत।
धनम्
सन्धिविग्रहं कुरुत।
त्यजेत्सुखम् = ______
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
सुखार्थी विद्यां न लभते।
सन्धिं कुरुत।
पशुभिः + तुल्यम् = ______
समानार्थकशब्दं चिनुत।
स्वापः - ______
विरुद्धार्थकशब्दं लिखत।
नित्यम् × ______
स्तम्भमेलनं कुरुत।
| अ | आ |
| स्वीयम् | गणना |
| चिन्तनम् | वसुधा |
| अन्यः | निजः |
| पृथिवी | परः |
विरुद्धार्थकशब्दं लिखत।
उपकारः × ......।
एकवचने परिवर्तयत।
देवताः रमन्ते।
रूपपरिचयं कुरुत।
पिपासया
रूपपरिचयं कुरुत।
पयः
विशेषण-विशेष्य-सम्बन्धः।
| विशेष्यम् | विशेषणम् |
| पादतलौ | सतेजः |
| अभ्यासः | मलिनम् |
| मनः | आर्द्रौ |
| शरीरम् | उत्तमः |
मेलनं कुरुत।
| विशेष्यम् | विशेषणम् |
| १. कपाटिका | १. सुलभम् |
| २. कोषग्रन्थः | २. विशाला |
| ३. कण्ठस्थीकरणम् | ३. भिन्नाः |
| ४. अर्थाः | ४. पद्यमयः |
सूचनानुसारं वाक्यपरिवर्तन कुरुत।
छात्राः अमरकोषं कण्ठस्थं कुर्वन्ति स्म। ('स्म' निष्कासयत)
समानार्थकशब्दं लिखत।
अमरकोषः - ______
योग्यविशेषणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।
अमरकोषे ______ काण्डानि सन्ति।
विशेषण-विशेष्य-अन्वितिं पूरयत।
| विशेषणम् | विशेष्यम् |
| ______ | पुत्रः |
| लिखितम् | ______ |
सन्धिविग्रहं कुरुत।
ममाज्ञया = ______
श्लोकात् 'क्त' प्रत्ययान्तरूपाणि (क. भू. धा. वि.) चिनुत लिखत च।
सन्धिं कुरुत।
तस्य + अन्तः (अ + अ) = ______
अधोदत्तं वाक्यं श्लोकस्थ-समानार्थक -शब्दैः पुनः लिखत।
हरिणः शष्पाणि भक्षयति तथापि व्याधः तस्य शत्रुः भवति।
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
शष्पम् - ______
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
पश्यसि - ______
सूचनानुसार वाक्यपरिवर्तन कुरुत।
एकः मनुष्यः प्रतिवसति स्म। (स्म निष्कासयत)
समानार्थकशब्दं लिखत।
दुर्भिक्षम् - ______
शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।
वाल्मीकिः = ______
सवर्णदीर्घसन्धिः।
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
______ + ऊर्जा = भानूर्जा।
भवान्/ भवती -स्थाने त्वं योजयित्वा वाक्यानि लिखत।
भवान् अत्र उपविशतु।
भवान्/भवती -स्थाने त्वं योजयित्वा वाक्यानि लिखत।
भवन्तः भद्राणि पश्यन्तु।
अयादिसन्धिः।
ओ/औ + कोऽपि स्वरः = अव्/आव्
______ + एव = द्वावेव।
वृद्धिसन्धिः।
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
मम + ______ = ममैश्वर्यम्।
विशेषण-विशेष्ययोः युग्मं पूरयत।
| पुंलिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम् | विभक्तिः |
| पवित्रः जलाशयः | (पवित्र) नदी | (पवित्र) गङ्गाजलम् | प्रथमा |
| (नूतन) मण्डपम् | नूतनां भाषाम् | (नूतन) मन्दिरम् | द्वितीया |
| समृद्धेन (कोष) | (समृद्ध) परम्परया | समृद्धेन (नगर) | तृतीया |
| (कोमल) स्वभावाय | कोमलायै (लता) | (कोमल) पुष्पाय | चतुर्थी |
| प्राधीनात् (उपाय) | (पराधीना) बुद्ध्याः | (पराधीन) जीवनात् | पञ्चमी |
| (उत्तम) पुरुषस्य | उत्तमायाः (पत्रिका) | उत्तमस्य (वृत्तपत्र) | षष्ठी |
| (स्थूल) पुत्रे | स्थूलायाम् (कन्या) | (स्थूल) पात्रे | सप्तमी |
| हे (श्रेष्ठ) ऋषे | हे श्रेष्ठे (तपस्विनी) | हे (श्रेष्ठ) औषध | सम्बोधनम् |
कुशलः वैमानिकः।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| कुशलः वैमानिकः | कुशलौ ______ | ______ वैमानिकाः | प्रथमा |
| ______ वैमानिकम् | ______ वैमानिकौ | कुशलान् ______ | द्वितीया |
| कुशलेन ______ | कुशलाभ्यां ______ | ______ वैमानिकैः | तृतीया |
| ______ वैमानिकाय | ______ वैमानिकाभ्यां | कुशलेभ्यः ______ | चतुर्थी |
| कुशलात् ______ | कुशलाभ्यां ______ | ______ वैमानिकेभ्यः | पञ्चमी |
| ______ वैमानिकस्य | ______ वैमानिकयोः | कुशलानां ______ | षष्ठी |
| कुशले ______ | ______ वैमानिकयोः | ______ वैमानिकेषु | सप्तमी |
| कुशल ______ | ______ वैमानिकौ | कुशलाः ______ | सम्बोधनम् |
योग्यरूपं योजयत।
नारदः ______ शरणं गच्छति। (विष्णु)
योग्यरूपं योजयत।
कृषीवलस्य समीपे पञ्च ______ सन्ति। (धेनु)
योग्यरूपं योजयत।
______ रसः मधुरः। (इक्षु)
योग्यरूपं योजयत।
हिमालयस्य ______ हिमाच्छादितानि। (सानु)
त्वान्तं/ल्यबन्तम् अव्ययं निष्कासयत।
छात्राः उत्तरं लिखित्वा स्मरन्ति।
त्वान्तं/ल्यबन्तम् अव्ययं निष्कासयत।
कविः काव्यं विरचय्य गायेत्।
आज्ञार्थ-रूपाणि चिनुत लिखत च।
हे राधिके, फलानि गणय।
आज्ञार्थ-रूपाणि चिनुत लिखत च।
आचार्ये, अपि वयं क्रीडाङ्गणे क्रीडाम?
विधिलिङ्रूपाणि चिनुत लिखत च।
कदाचित् अहमपि वैद्या भवेयम्।
रूपाभ्यासं कुरुत।
भवेयुः
रूपाभ्यासं कुरुत।
शिक्षेत
रूपाभ्यासं कुरुत।
संरक्षेम
उचितलिङ्गानुसार पृथक्कुरुत।
| पुं. | स्त्री. | नपुं. |
| ______ | ______ | ______ |
(योषित्, भूभृत्, दिनकृत्, विद्युत्, वियत्, क्ष्माभृत्, तडित्)
समस्तपदं लिखत।
कल्पनाम् अतीतः - ______
'क्तवतु' प्रत्ययान्तरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत।
महिला शाटिकां ______। (धृ)
'क्तवतु' प्रत्ययान्तरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत।
देवाः भक्तान् ______। (रक्ष्)
नाम-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| नीलकण्ठाय | ______ | ______ | चतुर्थी |
| ______ | सरस्वत्योः | ______ | षष्ठी |
| ______ | ______ | नक्षत्राणि | द्वितीया |
सर्वनामतालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| तव, ते | ______ | ______ | षष्ठी |
| ______ | आभ्याम् | ______ | चतुर्थी |
| ______ | ______ | भवतः | द्वितीया |
सर्वनामतालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| अस्याम् | ______ | ______ | सप्तमी |
| ______ | ______ | भवतीभ्यः | चतुर्थी |
| ______ | इमे | इमानि | प्रथमा |
सवर्णदीर्घसन्धिः।
______ + एतत् = खल्वेतत्।
सन्धिकोषः।
तच्छवासनम् = ______ + शवासनम्।
सन्धिकोषः।
______ = प्रयासः + च।
सन्धिकोषः।
सङ्गीतमपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
परोपकारार्थमिदम् = ______ + इदम्।
सन्धिकोषः।
धियो हरति = ______ + हरति।
सन्धिकोषः।
ज्ञानिनामपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
किञ्चित् = ______ + चित्।
सन्धिकोषः।
______ = विपरीताः + चेत्।
सन्धिकोषः।
शक्रादपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
ततोऽजाभिः = ततः + ______।
सन्धिकोषः।
साऽपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
राज्याभिषेकादनन्तरम् = राज्याभिषेकात् + ______।
सन्धिकोषः।
आगतास्मि = ______ + अस्मि।
सन्धिकोषः।
दारकद्वयमुपनीतम् = दारकद्वयम् + ______।
सन्धिकोषः।
पुनर्भूयान् = पुनः + ______।
'इदम्' सर्वनाम पुंलिङ्गम्।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| अयम् | ______ | ______ | प्रथमा |
| इमम्/एनम् | ______ | ______ | द्वितीया |
| अनेन /एनेन | ______ | ______ | तृतीया |
| अस्मै | ______ | ______ | चतुर्थी |
| अस्मात् | ______ | ______ | पञ्चमी |
| अस्य | ______ | ______ | षष्ठी |
| अस्मिन् | ______ | ______ | सप्तमी |
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
दा-यच्छ् = ______
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
वि + रम् = ______
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
रुच् = ______
