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प्रश्न
शीतल वाणी में आग- के होने का क्या अभिप्राय है?
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उत्तर
शीतल वाणी में आग होने का अर्थ यह है कि कवि अपनी शांत और सौम्य भाषा के भीतर वियोग की पीड़ा छिपाए हुए जीवन जी रहा है। यहाँ ‘आग’ से आशय उसकी आंतरिक वेदना से है। यद्यपि कवि की वाणी शांत प्रतीत होती है, फिर भी उसके भीतर असंतोष और विद्रोह की भावना गहरी है। वह समाज की वर्तमान व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है और प्रेमहीन संसार को स्वीकार नहीं करता। अपनी शीतल और मधुर वाणी के माध्यम से भी वह उत्साह, आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ता जैसी भावनाएँ बनाए रखता है, जिससे वह दूसरों को भी जागरूक कर सके।
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