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बच्चे किस बात की आशा में नीड़ों से झाँक रहे होंगे?

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प्रश्न

बच्चे किस बात की आशा में नीड़ों से झाँक रहे होंगे?

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उत्तर

बच्चों को लगता है शाम ढल आयी है। उनके माता-पिता अब उनके लिए भोजन लेकर आते ही होगें। अतः वे अपने माता-पिता को देखने के लिए नीड़ों से झाँक रहे हैं। माता-पिता से उनका मिलन हो जाएगा तथा उनके पेट की आग भी शांत हो जाएगी। इस तरह नीड़ों से झाँकना उनकी प्रतीक्षा को दर्शाता है।
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दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!
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अध्याय 1: हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत) - अभ्यास [पृष्ठ ८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 1 हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत)
अभ्यास | Q 5. | पृष्ठ ८
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