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“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।

स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

पक्षियों में कोई भेदभाव नहीं होता। चाहे वे खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस या शुक हों—सब आपस में मिल-जुलकर रहते हैं, मिल-जुलकर खाते हैं और एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। उनके जीवन में ईर्ष्या, स्वार्थ और द्वेष नहीं होते।

यह भावना हमारे लिए इन कारणों से उपयोगी है–

  1. एकता: जब हम सब मिल-जुलकर रहते हैं, तो परिवार, समाज और देश में एकता बनी रहती है।
  2. भाईचारा: आपसी सहयोग से सभी वर्गों और समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ता है।
  3. समस्याओं का समाधान: विपत्ति के समय मिलकर काम करने से बड़ी-से-बड़ी कठिनाई भी आसानी से हल हो जाती है।
  4. शांति और सुख: आपसी फूट और द्वेष दूर रहने से समाज में शांति, सुख और सद्भाव बना रहता है।

इस प्रकार पक्षियों का जीवन हमें यह आदर्श सिखाता है कि मिल-जुलकर रहना और एक-दूसरे की सहायता करना ही सुखी जीवन का सच्चा मंत्र है।

 
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अध्याय 9: चिड़िया - पाठ से [पृष्ठ १२०]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 9 चिड़िया
पाठ से | Q (क) | पृष्ठ १२०
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