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प्रश्न
“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
स्पष्ट करा
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उत्तर
पक्षियों में कोई भेदभाव नहीं होता। चाहे वे खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस या शुक हों—सब आपस में मिल-जुलकर रहते हैं, मिल-जुलकर खाते हैं और एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। उनके जीवन में ईर्ष्या, स्वार्थ और द्वेष नहीं होते।
यह भावना हमारे लिए इन कारणों से उपयोगी है–
- एकता: जब हम सब मिल-जुलकर रहते हैं, तो परिवार, समाज और देश में एकता बनी रहती है।
- भाईचारा: आपसी सहयोग से सभी वर्गों और समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ता है।
- समस्याओं का समाधान: विपत्ति के समय मिलकर काम करने से बड़ी-से-बड़ी कठिनाई भी आसानी से हल हो जाती है।
- शांति और सुख: आपसी फूट और द्वेष दूर रहने से समाज में शांति, सुख और सद्भाव बना रहता है।
इस प्रकार पक्षियों का जीवन हमें यह आदर्श सिखाता है कि मिल-जुलकर रहना और एक-दूसरे की सहायता करना ही सुखी जीवन का सच्चा मंत्र है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
