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साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है?

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प्रश्न

साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है?

संख्यात्मक
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उत्तर

[शुद्ध द्रव] या [शुद्ध ठोस] = `"मोलों की संख्या"/"L में आयतन"`

`= ("द्रव्यमान"//"आण्विक द्रव्यमान")/"आयतन"`

`= "द्रव्यमान"/"आयतन" xx 1/("आण्विक द्रव्यमान")`

`= "घनत्व"/"आण्विक द्रव्यमान"`

शुद्ध ठोस या शुद्ध द्रव के आण्विक द्रव्यमान तथा घनत्व नियत ताप पर निश्चित होते हैं, अतः इनके मोलर सांद्रण नियत होते हैं। यही कारण है कि इन्हें साम्य स्थिरांक के व्यंजक में उपेक्षित किया जा सकता है।

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रासायनिक साम्यावस्था का नियम तथा साम्यावस्था स्थिरांक
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अध्याय 6: साम्यावस्था - अभ्यास [पृष्ठ २२९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
अध्याय 6 साम्यावस्था
अभ्यास | Q 7.7 | पृष्ठ २२९
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