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प्रश्न
‘प्रकृति हर पल नया रूप धारण करती है’ इससे संबंधित अपने आस-पास के उदाहरणों को देकर अपने मित्रों से संवाद कीजिए।
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उत्तर
‘प्रकृति हर पल नया रूप धारण करती है’ - यह एक बहुत बड़ा सच है। हमारे आस-पास का वातावरण लगातार बदलता रहता है। आइए, इस विषय पर मित्रों के बीच होने वाले एक संवाद को देखते हैं।
स्थान: एक पार्क का कोना, जहाँ तीन मित्र बैठे हैं।
पात्र: राहुल, अमित और स्नेहा।
| राहुल: | (आसमान की तरफ देखते हुए) अरे अमित, स्नेहा! जरा ऊपर देखो। अभी थोड़ी देर पहले आसमान एकदम साफ था, और अब देखो कैसे काले-घने बादल छा गए हैं। |
| अमित: | हाँ राहुल! यही तो प्रकृति का जादू है। सच कहा गया है कि 'प्रकृति हर पल नया रूप धारण करती है'। सुबह जब मैं सोकर उठा था, तो सूरज की हल्की सुनहरी किरणें कितनी शांत लग रही थीं। और अब देखो, मौसम कितना रोमांचक हो गया है। |
| स्नेहा: | तुम दोनों बिल्कुल सही कह रहे हो। सिर्फ आसमान ही क्यों, अपने आस-पास के इन पेड़ों को ही देख लो। पतझड़ में ये सारे पेड़ बिल्कुल सूखे और बेजान दिख रहे थे। ऐसा लगता था जैसे इनमें अब कभी जान नहीं आएगी। लेकिन देखो, वसंत आते ही इन पर हरी-भरी कोमल पत्तियां और रंग-बिरंगे फूल खिल गए हैं। |
| राहुल: | बिल्कुल स्नेहा! मैंने अपने घर के बगीचे में भी यह बदलाव महसूस किया है। कल तक जो गुलाब की कली एकदम बंद थी, आज सुबह वह एक सुंदर फूल बनकर मुस्कुरा रही थी। प्रकृति में कुछ भी एक जैसा नहीं रहता। |
| अमित: | और देखो, अभी हल्की हवा चल रही थी और अचानक रिमझिम बारिश शुरू हो गई! सूखी जमीन से मिट्टी की कितनी सोंधी-सोंधी खुशबू आ रही है। गर्मी से तपती हुई सड़क पल भर में ठंडी और चमकदार हो गई है। |
| स्नेहा: | यही तो इसकी खूबसूरती है। प्रकृति हमें सिखाती है कि बदलाव ही जीवन का नियम है। चाहे सुबह का शांत माहौल हो, दोपहर की तेज धूप हो, या शाम का ढलता हुआ सूरज,हर पल का अपना एक अलग रूप और रंग होता है। |
| राहुल: | सच में, अगर हम अपने आस-पास ध्यान से देखें, तो प्रकृति का हर जर्रा हमें एक नई कहानी सुनाता है। हमें इस बदलते रूप को महसूस करने के लिए बस थोड़ी फुर्सत चाहिए। |
| अमित: | सही कहा! चलो, अब इस बदलते मौसम का मजा लेते हैं और चाय पीने चलते हैं! |
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया है। जोड़े में खंखड़-सा हो जाता है और कभी-कभी डर लगता है कि यह सूख तो नहीं रहा है, लेकिन वसंत आते ही इसके भीतर सोई ऊर्जा जागने लगती है, प्राणरस छलकने लगता है और क्रमश: नई टहनियों तथा नये पत्तों के सौंदर्य से लद जाता है। मैं उसे देख रहा हूँ और लगता है, अब इसमें फूल आया, तब इसमें फूल आया। हाँ, यह हरसिंगार बहुत मस्त है। आषाढ़ में हलकी-हलकी हँसी उसमें फूटने लगती है, फिर शरद में तो कहना ही क्या! तारों भरा आसमान बन जाता है। रात भर जगमग-जंगमंग करता रहता है और सुबह को अनंत फूलों के रूपमें धरती पर बिछ जाता है। रात भर उसकी महक घर में टहलती रहती है। |
(1) कृति पूर्ण कौजिए: (2)
हरसिंगार में होने वाले बदलाव
- वसंत ऋतु में ______
- वर्षा ऋतु में ______
(2) (i) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)
ऊर्जा जागने लगती है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- पुरानी × ______
- दिन × ______
(3) “प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
| 'चिड़ियाँ चहचहा उठीं। फिर समूह में फुर्र से उड़ी और आकाश में पंखों व स्वरों की एक लय बन गई, फिर वे लौट आईं। हाँ उनके आश्रय की तरह यह हरसिंगार का पेड़ कितना खुश हो रहा है। जैसे कह रहा हो, “आओ चिड़ियो, मेरी डाल-डाल पर फुदको और गाओ। आओ चिड़ियो अपने मीठे-मीठे स्वरों से मुझे नहलाओ।" मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया हैं। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए- (2)
(i)

(2) (i) प्रत्यय लगाकार वाक्य फिर से लिखिए: (1)
पेड़ कितना खुश हो रहा है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- अप्रसन्न - ______
- कड़वे - ______
(3) चिड़ियों की चहचहाट पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
फूलों से बनने वाली औषधियाें की जानकारी अंतरजाल पर पढ़िए।
‘बढ़ती आबादी, कटते वन, प्रदूषण से प्रभावित होता जन जीवन’ पर अपने विचार लिखिए।
‘वनभोज’ महोत्सव का आयोजन कब, क्यों और कहाँ किया जाता है, इसके बारे में बड़ों से सुनिए तथा लिखिए।
संजाल पूर्ण कीजिए:

पाठ में आई वनस्पतियों का वर्गीकरण कीजिए:
| अ.क्र | लताएँ | पौधे | वृक्ष |
कृति पूर्ण कीजिए:
हरसिंगार में ॠतुओं के अनुसार होने वाले बदलाव
| वसंत | |
| शरद |
कृति पूर्ण कीजिए:

क्रमानुसार ॠतुओं के नाम लिखिए:
| १ | वसंत |
| २ | |
| ३ | |
| ४ | |
| ५ | |
| ६ |
