Advertisements
Advertisements
प्रश्न
पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए?
Advertisements
उत्तर
पावस ऋतु में पर्वत प्रदेश की प्रकृति का रूप बदल जाता है। चारों ओर हरियाली छा जाती है, मेघों से ढके पर्वत बार-बार नीचे जल में अपना विशाल आकार निहारते हैं। पर्वत के चरणों में फैला हुआ ताल दर्पण की तरह चमकता है। झरने झर-झर बहकर नदियों और तालों को भर देते हैं, और मोतियों की लड़ियों जैसे सुंदर दृश्य उत्पन्न करते हैं। कहीं जल की धाराएँ ऊँचाई से गिरकर छींटे उड़ाती हैं तो कहीं बादल गरजते और वर्षा करते हैं, जिससे वातावरण में शीतलता और ताजगी भर जाती है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
‘सहस्र दृग-सुमन’ से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?
कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है?
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
−यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।
इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
‘पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
कविता में पर्वत को कौन-सा मानवीय कार्य करते हुए दर्शाया गया है?
पर्वतीय प्रदेश में स्थित तालाब के सौंदर्य का चित्रण कीजिए।
पर्वतों पर उगे पेड़ कवि को किस तरह दिख रहे हैं?
कविता में पर्वत के प्रति कवि की कल्पना अत्यंत मनोरम है-स्पष्ट कीजिए।
पर्वतीय प्रदेश में उड़ते बादलों को देखकर कवि ने क्या नवीन कल्पना की है?
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।
आपके पाठ्यक्रम में किस कविता में वर्षा के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में पर्वतों को ‘मेखलाकार पर्वत अपार’ कहने का कवि का क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर कवि ने वृक्षों को पर्वतों की उच्चाकांक्षाएँ क्यों कहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर पर्वतों द्वारा अपने रूप-सौंदर्य को निहारने की कल्पना और कारण को स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में पर्वतों की दृष्टि किसे कहा गया है? पर्वत अपना प्रतिबिंब कहाँ और क्यों निहार रहे हैं?
“जिसके चरणों में पला ताल, दर्पण - सा फैला है विशाल" -इन पंक्तियों में कवि ने ताल को किस रूप में चित्रित किया है?
