हिंदी

पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।

लेखन कौशल
Advertisements

उत्तर

डायरी लेखन:

संक्षिप्त डायरी प्रविष्टि दिनांक: २९ मई, २०२६

प्रिय डायरी,

आज पाठ पढ़ते-पढ़ते मेरे माता-पिता का स्नेह युक्त व्यवहार याद आ गया। माँ की छोटी-छोटी परवाहें - सुबह तैयार कर दिया हुआ पराठा, मेरी पढ़ाई के लिए जगाना - और पिता की मुस्कान व स्नेहपूर्ण आवाज़ मुझे बार-बार भावविभोर कर देती है। पाठ में बताये गए पारिवारिक दृश्य मेरी यादों को और ताज़ा कर गए। मैं उन्हें आज ज़्यादा समय दूँगा और अपना धन्यवाद व्यक्त करूँगा।

तुम्हारा,
किशोर

shaalaa.com
माता का आँचल
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1: माता का अँचल - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Kritika Bhag 2 Class 10
अध्याय 1 माता का अँचल
प्रश्न-अभ्यास | Q 7. | पृष्ठ ८

संबंधित प्रश्न

आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?


इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।


यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।


माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।


इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है, वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?


‘माता का अँचल’ पाठ में भोलानाथ के पिता की दिनचर्या का वर्णन करते हुए आज के एक सामान्य व्यक्ति की दिनचर्या से उसकी तुलना कीजिए।


‘माता का अँचल’ पाठ में वर्णित समय में गाँवों की स्थिति और वर्तमान समय में गाँवों की स्थिति में आए परिवर्तन को स्पष्ट कीजिए।


पिता भले ही बच्चे से कितना लगाव रखे पर माँ अपने हाथ से बच्चे को खिलाए बिना संतुष्ट नहीं होती है- ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


बच्चे रोना-धोना, पीड़ा, आपसी झगड़े ज्यादा देर तक अपने साथ नहीं रख सकते हैं। माता के अँचल’ पाठ के आधार पर बच्चों की स्वाभाविक विशेषताएँ लिखिए।


भोलानाथ और उसके साथी खेल-खेल में फ़सल कैसे उगाया करते थे?


भोलानाथ की माँ उसे किस तरह कन्हैया बना देती?


आर्जकल बच्चे घरों में अकेले खेलते हैं, पर भोलानाथ और उसके साथी मिल-जुलकर खेलते थे। इनमें से आप भावी जीवन के लिए किसे उपयुक्त मानते हैं और क्यों?


भोलानाथ के पिता भोलानाथ को पूजा-पाठ में शामिल करते, उसे गंगा तट पर ले जाते तथा लौटते हुए पेड़ की डाल पर झुलाते। उनका ऐसा करना किन-किन मूल्यों को उभारने में सहायक है?


‘माता का अंचल’ पाठ में वर्णित बचपन और आज के बचपन में क्या अंतर है? क्या इस अंतर का प्रभाव दोनों बचपनों के जीवन मूल्यों पर पड़ा है? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।


'माता का अँचल' पाठ में भोलानाथ का अपने माता-पिता से बहुत लगाव है। बचपन में हर बच्चा एक पल के लिए भी माता-पिता का साथ नहीं छोड़ना चाहता है, किंतु माता-पिता के बूढ़े हो जाने पर इनमें से ही कुछ उन्हें साथ न रखकर वृद्धाश्रम में पहुँचा देते हैं। ऐसे लोगों को आप किन शब्दों में समझाएँगे? विचार करके लिखिए।


वात्सल्य और ममता की आधार-भूमि एक रहने पर भी माता-पिता और बच्चों के संबंधों में तब से अब तक बहुत बदलाव हुए हैं। ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर इसे सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।


'माता का अँचल' पाठ में बच्चों की दिनचर्या आजकल के बच्चों की दिनचर्या से भिन्न है, कैसे? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×