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पाठ में आए लोकभाषा के इस संवाद को समझकर इसे खड़ी बोली हिंदी में ढालकर प्रस्तुत कीजिए। हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचैकी छाती पै

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प्रश्न

पाठ में आए लोकभाषा के इस संवाद को समझकर इसे खड़ी बोली हिंदी में ढालकर प्रस्तुत कीजिए।

हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा भूँजब और राज करब, समुझे रहौ।

भाषांतर
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उत्तर

हम कुतिया-बिल्ली नहीं हैं। मेरा मन करेगा तो मैं दूसरे के घर जाऊँगी, अन्यथा तुम लोगों की छाती पर ही चने भुनूँगी और राज करुँगी, यह समझ लेना।

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अध्याय 10: महादेवी वर्मा (भक्तिन) - अभ्यास [पृष्ठ ७५]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 10 महादेवी वर्मा (भक्तिन)
अभ्यास | Q 3. (च) | पृष्ठ ७५
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